महावीर का जीवन-दर्शन | Mahaaviir Kaa Jiivan Drashan
श्रेणी : इतिहास / History

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutRishabhdas Ranka
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
4 MB
कुल पष्ठ :
51
श्रेणी :
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about रिषभदास रांका - Rishabhdas Ranka
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)महावीर का जीवन-दड्शेंन
---<>< ६ ~= --
स्वरूप से अनभिज्ञ लोग
संसार में बहुत लोग ऐसे होते हैं जिन्हें अपने स्वरूप का
ज्ञान नहीं होता । वे कहाँ से आए और म्रत्यु के बाद करी जवेगे
इसकी भी उन्हें कोई कल्पना नहीं होती । उनमें जो आत्मा है
उसका पुनजन्म होगा या नददीं यह मी वे नही जानते | उन्हें यह
भी माद नहीं कि वे इस तरह जन्म-मरण के फेरे क्यो करते रहते
हैं और उन्हें संसार में सख-दुःख क्यों भोगने पड़ते हैं |
जिज्ञासु आत्मार्थी
लेकिन कुछ आत्मार्थी पुरुष ऐसे भी होते हैं जो अपनी सद्दज
स्मृति या अनुभव से अथवा अन्य भनुभवियों से इस बात की जान-
कारी प्राप्त करते हैं कि उनका स्वरूप क्या है । और इस शझारीर में
जो आत्मा है, वह केसे सत् यानी नादान होने बाला, आनंद रूप
और ज्ञानयुक्त है और कम-बन्घनों के कारण वह भिन भिन
योनियों मे क्य जन्म-मरण करता हे | अपनी वत्तियों से उसे यह
ज्ञात होता है कि चहद किस प्रकार के शरीर को त्याग कर आया है
इस शरीर को त्यागने पर किस अवस्या को प्राप्त होगा । ये जन्म-
मरण के चक्कर उसे अपने द्वारा किए. हुए कम-बन्धनों के कारण
करने पड़ते हूं । और झुद्ध चैतन्प को आनंद तया सुखरूप होने
User Reviews
No Reviews | Add Yours...