सात इनक्रलाबी इतवार भाग - 2 | Sat Inkralabee Itawar Bhag - 2

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Book Image : सात इनक्रलाबी इतवार भाग - 2  - Sat Inkralabee Itawar Bhag - 2

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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र सात इनक्रलाबी इतवार » | १८६ यह मत भूलना किं यहाँ दो श्रादमी एेसे हं जिनके प्राणों की र्ता तुम्हें जान पर खेलकर करनी हे । तसश्चात्‌ उत्तर की प्रतीक्षा किये बिना दी, वे दोनों चले गये। वे परिवतन-यंत्र के नीचे पर्हुचे । किसी प्रकार का श्रागानपीछा किये बिना, किप्रियानो फ़ौरन धातु की सीढ़ी पर चढ़ने लगा । चारों शोर प्रश्नात्मक दृष्टि दौड़ाता हुआ, दोनों द्वाथों में रिवालवर लिये हुए, सामर खंभ के नीचे पहरा दे रहा था । इम लगभग १०० गज़ के अंतर पर हैं | घड़ी के पुर्जों के समान दर एक अपना कतव्य सुचारु रूप से पालन कर रहा हैं । परंठ कुछ दी क्षण पश्चात्‌ सामर किप्रियानों से कुछ: कहता है शरोर किप्रियानो कुद देर सोच-समककर ऊपर चढ़ने लगता है । परिवतन यंत्र में तीन तार एक श्रोर से श्राकर दूसरी श्रोर बाहर निकल जाते हैं । जब कहीं एक लाख वोल्ट परिवर्तित होती हैं तो नगर के प्रकाश, घरेलू कामों तथा व्यापारिक आवश्यकताओं का भरना भरता है । खंगमे की चोटी पर पहुंचकर किप्रियानो ने झपने टोप तथा सूट की पुनः परीक्षा की । यदि कद्दीं बाल बराबर भी खरोंच हुई तो वह जलकर राख हो जायगा । किन्तु वह समी काम बुद्धियानी से कर्ता है । वह सशीघ्र एक मन्द तनाव के तार से श्रपने पास के तार का एक खिरा भिलाता है श्रौर उसका दूसरा सिर खाली दोड देता है । हम सरिता के उसपार ला बाम्बिला तथा रोज़ालीज़ की रोशनी देख रहे हैं । उत्तरीय विच्युत्‌ केन्द्र की शहद के छते जैसी खिड़कियों की पक्तियाँ प्रकाश से चमचमा रही हैं । सेनटियागो को इस कारण क्रोध चढ़ रहा है कि अभी तक कोई शत्रुददी नज़र नहीं आया है जिस पर कि वह गोली चलाता । गरेको दरषतरिश में कहता द-- भिड्रिड के सभी बू्वां लोगों को, जो इस समय होटलों में रंग- _ रेलियाँ मना रहे हैं और यह श्राशा कर रहे हैं कि हम पीस डाले जाँयगे, यदि विद्युत्‌ द्वारा मार डाला जाय तो केषा हो ! विश्वासघातियों की सोटरें




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