सात इनकलाबी इतवार भाग - 1 | Saat Inakalabee Itwaar Bhag - 1
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
41 MB
कुल पष्ठ :
185
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)क सात इनक़लाबी इतवार श्र | ७सब कुछ लाल ओर पीला । में वहाँ के व्यवस्थापक महोदय की खोज
म इधर-उधर दृष्टिपात करने लगा। अंत में पूछता-पूछता मैं उस
व्यक्ति के पास जा पहुँचा जो चेम्बर का प्रेसिडेए्ट बतलाया जाता था।.
मैंने उससे पूछा--यह सब किस लिए है ! उसकी मुद्रा कठोर हो गई
और उसने मेरी ओर इस तरह दृष्टिपात किया जिस प्रकार एक জী
ন্তচ্ছাহী ओर उस वक्त देखती है जब वह तुमसे किसी प्रकार का भी
सम्पक रखना नहीं चाहती ओर अंत में कहा कि यह पार्लियामेन्ट का
उद्घाटन हैं । मेरा मन उससे कितने ही और प्रश्न करने को कर रहा था
किन्तु वह अरनी काली ओर सफेद पोशाक में दर्जी की दुकान के पुतलों
की तरह देख पड़ता था और मुझे यह मय था कि कहीं मेरे अगले प्रश्न
से वह अपनी क्रमोज का सामना मैला करने पर मजबूर न हो जाय।.
ऊपरवाली गैज्रियों में द्वियाँ और पादरी थे। इमारे नीचे--बेंचों की
कतार और बिजली से दहकते हुए रंगीन बलों के गुच्छे । हर जगह
जहाँ देखो फोटोग्राफर ! जब मैंने देखा कि अब फोटो लिए जायेंगे
मैं धीरे-धीरे आगे बढ़ता हुआ पहली पंक्ति में जा पहुँचा। उस दिन
के दर चित्र में में हूँ । मैंने प्रेसिडिग्ट से पुनः बातचीत की और दो एक
आन्य व्यक्तियों से भी जो मंत्री मालूम होते थे । जनाबे मन--ये सब
शिष्ट लोग थे-लेकिन इन सब में से एक को भी यह ठीक पता नहीं था
ক্ষি নই কথা कर रहा है । वह मेरी ओर घूर रहे थे और मेरे प्रश्नों
का उत्तर देने को ज़रा भी तैयार न थे। फिर उनमें से एक ने खड़े
होकर बिलकुल घरेलू रीति से कुछ कह्दा ओर बाकी सब ने वाहवाही
की। तलश्चात् एक दूसरे ने स्पीच दी-यद्यपि बह शब्द-शब्द पर
भटकता था और वही बात फिर दोहरा देता था--फिर भी लोगों ने,
खूब तालियाँ बजाई । इस दृश्य ने मेरी मानसिक आँखों के सामने
'मिक्री माउस” फिल्म को ला खड़ा किया जहाँ बहुत से जानवर एकथिएटर में पहुँच जाते हैं, उद्विग्न हो पड़ते हैं श्रौर ताली बजाने लगते हैं।
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