वैज्ञानिकों की बातें | Vaigyaniko Ki Batain

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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परांजपे दृढ़ प्रतिज्ञ थे । एक बार चुके सो दे चुके 1 उन्होंने कहा--' मैं अपने गुरु तथा अपनी ज्ञानदात्री मातृसंस्था को जो वचन दे चुका हूं, उससे कदापि विमख नहीं हंगा | और वे सचमुच केवल पचहत्तर रुपये मासिक वेतन पर बीस वर्षों तक फर्ग्युसन कॉलेज की सेवाकरते रहे ।' टाइम मशीन ' तथा * शेप ऑफ थिंग्स ट कम जेसे वैज्ञानिक उपन्यासों के जनक एच. जी. वेल्स लंदन स्थित अपना मकान किसी को दिखा रहे थे। तीसरी मंजिल पर एक छोटे से कमरे को दिखाते हुए उन्होने कहा-'यह मेरा शयन-कक्ष हे ।'` परन्तु आप निचली मंजिल मेँ अपने शानदार कमरों में क्यों नहीं रहते? ' मित्र ने पूछा ।' वे कमरे मेरी नौकरानी और रसोइए के लिए हैं । दोनों पिछले बीस वर्षों से मेरे साथ रहते हैं ।' वेल्स ने कहा |मित्र ने तर्क किया-' मगर अन्य स्थानों पर तो छोटे कमरे नौकरों के लिए रखे जाते हैं ।'इसीलिए मेरे मकान में वैसी व्यवस्था नहीं है । मेरी मां किसी समय लंदन में एक मकान में नौकरानी थी !' वेल्स ने स्पष्ट किया ।परीक्षा की घड़ीबात इंग्लैंड की है । आचार्य जगदीशचंद्र बसु को इस प्रयोग का प्रदर्शन करना था कि पौधे भी हमारी तरह पीड़ा का अनुभव करते हैं । उनका प्रयोग देखने ढेर सारे वैज्ञानिक एवं जिज्ञासु नर-नारी आए । बसु+ वैज्ञानिकों की बातें ऊ 9




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