महावीर - वाणी | Mahveer Vani

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
6 MB
कुल पष्ठ :
276
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)ना सदकारी संपादक ) वथा आ पुत्वश्ना मूढः
वथा हिन्दी अदुवादमा सुद्रक भाई परमेष्ठीदासजी
जेन ( मालीक नेन्द्र प्रेसः ऊलितपुरः उत्तरधदेश्च )
ख बन्ने महाश्योप था पुरुतकना सुद्रणमां ज्ञे भारे
दिलचस्पी बतावेड छे ते मारे तेभनो बन्ेनो दूं
सिदोष आभारी दु.अद्दीं था बावत खाल जणाववी जोईप के जो
भा यन्ने भाईओप पुस्तकना मसुद्रण-संदोधन माहे
'दिलखस्पी न लीधी होत तो मुद्राराझ तना प्रभावने
लीघे फुश्तकने अते आपेल शुद्धिपत्रक केटलुंय लांबुं
थे गयुं होत.डा. भगवानदाखजीए पोतानी भ्रस्तावनामां
अणावेखु ऊ कै पस्तुत आवत्तिना कागद साय
नधी अने तेनु समर्थक कारण पण पोते ज सम जावेढ
छे. तेम हुं पण अदी आ वात नघ्रपणे ज्ञणाववानी
रजा लउ छुं के प्रस्तुत पुस्वकनां मूट्ट गाथाभोनुं
भने अनुवाद्नु मुद्रण मनपसंद नथी छतां महावीर
चाणी प्रत्ये सद्भाव राखनारो वाचक वग आ मुद्रण
प्रत्ये पण उशारता दाखवी तने वधावी लेशे ष
आहा अस्थाने नधी.महावीरवाणीनी कायापलटजागली बची आवृतिओ करतां भा सस्करणमां
जे विशेषता छे ते आ प्रमाणे छे:{ १२]
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