प्रेम | Prem

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Prem  by अश्विनी कुमार दत्त - Ashvini Kumar Dattरामवृक्ष बेनीपुरी - Rambriksh Benipuri

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अश्विनी कुमार दत्त - Ashvini Kumar Datt

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रामवृक्ष बेनीपुरी - Rambriksh Benipuri

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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जीवनी सन्ततं सानी थी कि यदि कटक फरेगा, तो पहला फल जशविनी बादू को सेंट करूंगा | घन्य ! जन मदात्मा गांधी वंगारु गये धे, तैः स्वयं उनसे मिलने के लिए उनके घर गये थे । आजन्स घ्रह्मचारी रहने, विशेष संयम ओर नियस रखने पर सी, कठिन परिश्रम के कारण, उनको बहुमून्न रोग हो गया था । इस दारुण रोग से उनका स्यास्य गिर गया था । चह चिकित्सा के लिए कल- कत्ते आभे ये बीं १९२३ द के नवम्बर में वह प्रेमरोक को सिधार गये । उक्त समय उनकी अवस्था ७ वपं की थी । सुनते दै, रोकमन्पि तिङ्क को भी इसी रोग की शिकायत थौ । 'व्रजमोहन-वियाख्यः में ही “बॉंघव-समिति* (सित्र-मंडऊ) नःसक एक नवयुवरकों को सभा है। उसकी पताका पर -'सत्य, प्रेम, पचित्रता*--यही मूल-मंत्र लिखा है। उस सभा का झधिवेशन प्रत्येक शनिवार की संध्या को होता है । उस अधिवेशन में किसी दिश्व-व्यापफ विपय पर नियसित्त रूप से ९५




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