तेरापंथ मर्यादा और व्यवस्था | Terapanth Maryada Or Vyavastha

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Book Image : तेरापंथ मर्यादा और व्यवस्था - Terapanth Maryada Or Vyavastha
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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„ २२ भिक्षु गण नदन-वन+. र३े टालोकर प्रकति चियण$ २४, र५ संघ स्तवना+ २६मधमे रहते दए दोप का प्रायश्चित्त कंसे मौर कितना ? + २७ उच्चता की परख+ २८ दुष्कर्मो का दुष्परिणाम+ २६ ईप्या परिहारिणी शिक्षा„ ३० गुण प्रसा+ ३१ साघक प्रशसा„» ३२० ३३ सयम शिक्षा४ उपदेदा रो चौपोइस कति में उपदेशात्मक विविध विपयो पर १५ दालें हैं, जिनके २४३ प्य हैँ। मत मे गोता के १२ व अध्याय के कुछ इलाकों का. मनुवाद है। कई ढालो के अत मे नाम तथा रचना सबत, स्थान आदि का उल्लेख नहीं है । इसम कुछ पद्य इतने मामिक हैं कि सीघी चोट करते हैं । प्रमादी व्यक्ति को चेतावनी के कुछ पद्यो का हाद इस प्रकार है--बडा” माइचय है कि राग, जरा बोर मरण जसे तीन तीन भीषण शन_ तुम्ह्वारे पीछे चले भा रह हैं । यह्द ता इनसे छुटकारा पाने के लिए पलायन का अवसर हे, फिर भी अरे मूख ! तुम सोए पड़े हो ?० चाद भौर सूरज दा बेल हैं, दिन भर रात्रि घडमाल हैं। जलरूपी भायुकम होत जा रहा दे । यह मत्यु एक विकराल रह है ।'ढाल दूसरी म--सुमति और घुमति का पाथवय दिखलान को दृष्टि से देवरानीसौर जेठानी का रूपक अपन दयक्रा एक नया उपक्रम है 1सुपात्र मौर बुपातश्र के नीर्‌ क्षीद विवेक सम्ब घी कुछ पद्यों का निष्क्प इस प्रकार है--22220] १ ० तोन भरि सारे लाया रोण जरा मरण जान । ण -दासण र अदषरे क्यु मूतो मूढ अयाण॥ ° बलदजेम चद सूर छ दिवस रात्रि घडमात। जल मायु मोषा कर, ए काल रेट विकराले ॥ २ उष्देण रो चोपो, दतर, गा० १५




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