नयनसुख विलास भाग - 1 | Nayanasukh Vilas Bhag - 1
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
10 MB
कुल पष्ठ :
320
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)नयन सुख विलास । [७
अध्याय ४० है । हिने पूर्व भागके २८ झअष्यायोकी सूचना `
घ भांति ६-
अर्थात् इष पूवं भाग्ये १७ अध्याय तो सेंने अपने
शिष्य चन्द्नङाड सेठ बागप्रस्थ निवाखीकी फर्मोप्रशो राग-
रागनि्योके भन्दाजपर रचे ये -तिन्मे बुषा रगनियोि
अन्द्नराख्टीका नाम मनि मोगष्टो जगद लिखा है । भोर
१९ अध्याय सपनी इच्छाम खै सावर्मीजिनों$ धम ध्यान
योज् रचिफुर पूर्व भागकू' पुरा किया है लो. जानोरो । लगे
उत्तर भागढ़े १२. भष्याय हैं तिमकी सूचना उत्तः भागके
प्रारस्थमें दिखेंगे तद्दां देखा लेना ।
अथ पूतं भागक २८ सध्यार्योष्ठ प्रथक् प्रषक् सूुषना
ढिखये हैं ।
न्द
वणन अध्याय
प्रथम भष्यायमें प्रन्थोत्पत्ति छारण पूवं पीटि 1 दौर
गायन सिखा हे तो: गवेय के । दुशदोषोंका बर्णन ऐ। दूजे
८ष्प्राय्ने मंगडायरणफ़े ३४ दोहे तेर्द धरद । रो चवरम।
घो उने । तीन भरषी ठाख्छे ठीन पद् । सीजे दष्यायमें
प्रौदीखी धषाडा द्मषपैत् चोवोलों महारापके २४ पद् {ए
मसे है कि भ्ोराश्रिष्ो खात वरो होती है णोरं शीगोक्
दाम सात ही होते हैं । मर्भाद एर ए म्ाराजके पदे
गनेष्य ठर दष घडोढा काढ बांदा हे । जें भादिनाभडीष्च
पद फ'ठाडेपें है तो बजितनाधजाका पद सेएदीमें है । ऐढ़ें
तीभे्रष्ा लाम रागक्ठा नान । रागका समय । सुरदद्े लेय
स्याम क| स्यामसे प्रभाव ठक । झमय झमयके रागो
बदुढ़ता बढ़ा गया दे। पुन: चौथे श्ष्यायम गुर मभनाष्ट
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