श्रीमत जवाहराचार्य जीवन और व्यक्तित्व | Shri Mat Jawahar Chariya Jivan Aur Vyaktiv

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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मनुष्य प्रकृति के रहस्य को कभी नहीं पा सकता ॥एक वार वालक जवाहर अपने किसी वाल- साथी के साथ वातचीत मे लीन थे । वांतो मे कितना समय व्यतीत हो गया, कुछ ध्यान नहीं । पर प्रारव्ध की अद्भूत लीरा कि वातचीत करके जसे ही वे हटे, पास कौ दीवार गिर पडी । वे लोग दीवार के पास खडे होकर ही बात कर रहे थे । दीवार ऐसे गिरी, जेसे मानो वह इन्तजार ही कर रही थी कि कब ये हटें गौर कब मैं गिरू ? इसलिए यह विश्वास करना हो पडता है कि मारने वाले से जिलाने वाला वड़ा है । जव तक जीवन लिखा है, कोई कुछ नहीं विगाड सकता और मृत्यु श्राने पर फिर एक क्षण भी जीने को मिलता नहीं । श्रतः मनुष्य को प्रमाद से वच कर श्रपने प्रत्येक क्षण का श्रच्छे कार्यों मे सदुपयोग करना चाहिए । अच्छे कार्ये श्रर्थात्‌ समग्र मानवता के कल्याण का -प्रयत्न, मानवता ही क्यो, प्राणीमात्र के कल्याण से प्रेरित होकर जीवन का सदुपयोग करना हो मनुष्य फा कत्तव्य है । श्री जवाहरलाल जो का पुण्य-चरित्र भी एक ऐसे हो महात्मा का जीवन-चरित्र है, जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन प्रारिमात्र के कल्याण के लिए भर्पित किया । इसीलिए वे हमारे प्रेरणा-केन्द्र हैं ।७




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