कन्या सुबोधिनी | Kanya Subodhini

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
103
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)१२ | रुन्पा सु चिंनीं
ग्र
याद् रतना । भूल न जाना । जिस काम 8
भला हो चह धर्म है । अपना महाक्रये ४ ? श.
भला करने से । जैन धर्म का निचोढ़ दूष 4
भलाई है:--
“भलाई कर चलो जग में, तुम्हारा मी भला हग ।
वही है जैन सच्चा जो, भलाई में दला दोगा ॥
“खुश रहना खुश रखना, जीना श्र जिलाना
सदा जैन के मुख प्र, वस एक यही दो गाना॥
अभ्यास
?--दूपरे लीय धमं भन कामो मरे वताते हैं?
र--भयवान् मह्यकीर मे घर्म करित काम मेँ वताया है?
रेनगरीवों की सेवा करना पाप है या घ्मं ?
इ--विद्या पढ़ना, सच चोलना क्या है /
प्र--एक वोल में धर्म का स्वरूप क्या है ?
सुपोध णठ १०
धमंस्थान में क्या नहीं करना
[जैन माता का कन्याओं को उपदेश]
स्थानक हम जनों का एक वहत दी पवित्र पर्मस्यार
है। वहाँ हम लोग सामायिक संवर आदि धर्म ध्यान
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