सुन्दरी डाकू या हीरे की खान | Sundari Daku Ya Heere Ki Khan
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
7 MB
कुल पष्ठ :
179
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)॥)८ “9 >» ` - सुदर-उवैः
आभो} बह्ीदी युक्च बाव है. हौ सैं तुमसे कह छुक्है,तरिकेजी-प्रान्तें मैने खोवेकषी खनको खन करते-करते जो आवि.
घकार किया, वह् एकदम कस्पनतीत, खघातीत है! मेरी बात
सुनकर तुमने शायद सोचा होगा, किनंने सीनेकी के बहुत
बड़ी शान पायी होगी ; पर नहीं, बेटा ! सोना धो श्वीज़ है ?
सैंने हरिव्ी खान देखी है। मुझे दीरोकी पहचान है। किम्बा-
ऱीकीं ददोरेकी खानोंकी बात तुमने खुनी होगी; पर डीक जावना,
यहाँ भी वैसा कीमती हीरा आजतक किसीने नहीं पार्या! क्यों ?
बचा तुम्हें मेरी वातष्डा विश्वास नहीं होता? कुछ प्रमाण चाहिये ?
अच्छा, मेरी क़मीज़के पाकेटमें हाथ डालो+-जो कुछ भिरे, उसेबाहर निकालों :*सारे ब्लौतूदलके बेवेनसा हॉकर स्पाइक्स-काटर उठा और
उस मरखे हुए वूद्धकी चमझडेकी बनी हुई क़मीज़की जेबमें हाथ
डालकर पक छोटीसों घेली निकालकर देखने लगा, जिसकी
मुँह पक, चमड़ेके फीतिसे बंँधा हुआ था! * . < पावृह ने कहा,--“थेखी खोऊकर उसके भीतरकी नीज़ देशों £येखीका सुद् खोल, स्पाइक्स-कार्टरने स्योही सखे दरुटा,
स्योंद्दी दस -बारइ चमकते हुए हीरे उसके सामने गिर पड़े । .वे'
होरे अच्छी तरह खरादे और साफ़ किये नहीं होनेपर भी इस
सरहकी उज्ज्वछ आशा दिखा रहे थे, कि उरक अमक्र लल,
रुपाइक्स-कारंर्के चिस्पयकी कोई सीमा न रही} शसने
असफुटसरसे कषा--“केसे आश्चर्यकी वात है} यै्क्वा मैंक छसपनान्दैष् रहा छू २४ ` * . -
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