जय बंगला | Jai Bangla

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
4.72 MB
कुल पष्ठ :
182
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)जय न्रॉगचा | १७देर पहले वागला देश का ढाका वेतार केन्द्र नये राष्ट्रीय गीत “झामर
सोनार दागला” को प्रसारित करने के वाद मौन हुमा है ।
मन प्रन्दर से व्याकुल है श्रौर कोशिश करने पर भी मुझे नीद नहीं
झा रही है। बस एक ही प्रश्न मस्तिष्क पर कुण्डली मारे फूंफफार रहा
है । याह्या प्रौर वगदघु शेख मुजीदुरंडमान की वार्ता का चपा परिणाम
निकलेगा ? क्या हमारा धाइिसक प्रतिरोध विजयी होगा प्रथवा सशस्त्र
सेना के सम्मुख हमे भी श्रस्त्रशस्त्र उठाने होगे । सशस्त्र सघ्प की
स्पिति में हमारा देश ह्सी भी मूल्य पर पाकिस्तान मे नहीं रह
सकेगा 1
यह प्रइन पौर इस प्रकार की विवारघारा श्राज वाल के हर
स्त्री-पुरुष, दाल-वृद्ध के मन मे हलचल मचाये हू। सारा देश श्रपने प्रिय
नेता शेख मुजीवुरंहमान के साथ पाकिस्तानी शोपण श्रौर भ्रत्याचार के
विरुद्ध सघष करने के लिए उठ खड़ा हुमा है । हमारी नीद, भूख, प्पास
सब कुछ जैसे समाप्त होकर बम एक माँग के रूप में सिमिट झ्राया है।
दगलादेश की दयनीय गरीबी, भुखमरी भ्रौर वेरोजगारी को दूर करने के
लिये हमे जनताधिक श्रघिकार चाहिये ।
पाषिस्तानी श्रघिनायक तेइस साल तक हमें घर्म की श्रफीम चटा-
चटा कर सजा धौर सचेत होने से रोकते रहे। हम एक श्रफीमची
की तरह नदे मे घुत्त पड़े भ्रपना खून 'चुसवाते रहे । जिसने भी तानाशाहों
वौ मर्जी के खिलाफ गरीबी या तवाही को दूर करने के लिये मावाज
उठायी, उसका गला घोट दिया गया।
पाज सारा दागला देश लम्वी तन्द्रा दूर कर जाग उठा है । देश के
साधारण झ्रादमी से लेकर पुलिस, पूर्वी चगाल राइफल्स, कोर्ट, क्चहरी,
उच्च न्यायालय सभी पाकिस्तानी सरकार के विरुद्ध एक जुट होकर खडे
हो गये हैं। जनरल टिक्का खाँ को उस समय अपनी सैनिक दाक्ति की
परनलियत का पता भ्च्छो तरह चल गया था जब उच्च न्यायासय के
जरायाघोशों मे उन्हें गवंनर की शपथ दिलाने से इकार कर दिया ।
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