श्रमणोंपासक संयम साधान विशेषांक | Samno Pasak Sayam Sadhna Viseshak

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Samno Pasak Sayam Sadhna Viseshak by नरेन्द्र भानावत - Narendra Bhanawat

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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निलिप्तता का साग छू श्राचार्यश्री नानेश च्छस भझ्रवर्सापिसी काल में भ्रन्तिम तीर्थकर भगवान्‌ महावीर के शासन में उनकी श्रात्मोद्धारक वाणी पर अधिकाधघिक चिन्तन श्रावश्यक है । उनकी वाणी का चरम लक्ष्य हे--सभी प्रकार के वन्वनों से म्रात्मा की मुक्ति । यह मुक्ति ही श्रात्मा की समाधि का चरम विन्दु है, लेकिन श्रात्मा की समाधि का ग्रारम्भ मुक्ति मार्ग पर चलने के संकल्प से ही हो जाता है । सूत्र समाधि से ग्रात्मनान का प्रकाश फैलता है तो विनय-समाधि ज्ञान के घरातल पर कठिन आ्राचरण की सफल पृष्ठभूमि का निर्माण करती है । फिर झाचार-समाधि एवं तपस्या-समाधि श्रात्मा को मुक्ति मार्ग पर गतिणील श्रौर प्रगतिशील वना देती है। श्रात्मसमाघि का यह मार्ग एक प्रकार से निलिप्तता का माग॑ है । सासारिकता से निलिप्त वनकर जितनी आ्रात्माभिमुखी वृत्ति का विकास होगा, उतनी ही अधिक शान्ति मिलेगी श्रौर मुक्ति-मार्ग पर गतिशीलता बढ़ेगी । निलिप्तता का मूल मंत्रः सम्यक्‌ आचरण ही निलिप्तता का एव उत्तके माध्यम से श्रात्म-समाधि का मून मूत्र रै । शुद्ध आचार के थिना जीवन गुष्क तथा प्रगतिहीन दी रहता च, 0 हे । शुद्ध धार एव व्यवहार की रिथति सम्यक्‌ जान एव सम्यक्‌ शद्धा के साथ नुद्ट वन्ती है । जान एवं क्रिया का भव्य समन्वय वनता रै, तव मुत्ति- दायिनी निलिप्तता का मार्ग प्रलरन हाता दै । सप दा प्रद्यार का होता हे । यहा लेप से अभिप्राय किमी णारीरिया न प्र स २ वा दर कार [प स्पा से 2 = भू ~~ ~ ~~ डा गेप से नहीं है. चहिका उस प्रकार दे ्रात्िक लेप से है, जो न्राच्या पर नट्कर्‌ शात्मस्वरप च्म सलिन चनाता है । यह सेप दो प्रमयर ब्य टस सूप में होते जाना ; फ 1 + शः दार मो छिपय श्य कप यं त छलि पत प के न्य ~ ~~“ ~ ~+ पड + बार सा र्प्य पच क्यं का न्यपत वात्य जड सन म उद्या र ५ च 1 १ च च ४८१4 क पि प्स क ० ५ कद 4 र नव < ४ (द ष ष्क 7 उठ स्टडी मे डा दर र 2 1 प मसु उम अ वृवृृन रु पुर गर ? स स्य दे व पे १ न क 9 द $ ५4 ॥ |! ४ उन र्युर म = ~ कार साहा # = 6 बा नहर... किक, रः + =. म + १ स्क र कफ यरा रप वद शन्ट र्व =. र उन करटापनल सनयः + वी ॥ ॥ ताः दर ५4 ष्ट क ॥ 1 नए - ह्र स्वमु न न ककन 2. 1 (रायन म मखा म प्‌ पारमस्यगाण पर सरलता दी ३ र प्यृष््‌ द न क ६3. 0 कष $ र जा सनक ~ - 4 4 4 वः कः ऋ: को वक कन्या ~ पद उपगना या घटना ४, पद सम गम्य 2 शन्न त (यत्न से रहो शपा ए लि. डर , हू म न कर कष क हक भज = कक है १ ` न्यु ~ १ ~ क ड न~ ५१? = क ड # दः कः ४4 है ९ ¢ हु 1 भ = ४ ^ ९ रव इ लिन = क अनः कच = ही




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