युगचारणा दिनकर | Yugachaarand-a Dinakar
श्रेणी : इतिहास / History

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
34 MB
कुल पष्ठ :
341
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)प्रथम श्रध्याय
जीवनी और व्यक्तित्वजन्म और परिवारदिनकर का जन्म, बिहार प्रदेश मे, सिमरिया नामक ग्राम के एक कुलीन `
कृषक परिवार में हुआ | प्रामाणिक जन्म-पत्र ्रप्राक्त होने के कारण उनकी
जन्मतिथि पूणं रूप से निरिचत नहीं है । उनकौ माता जी के कथनानुसार उनका
जन्म फसली सन् के १३१६ सालमे प्रारिवन, शुक्ल पक्षम बुध्वारकी रातको
लगभग बारह बजे हुआ था तथा उनकी छरी विजयादशमी को मनाई गई थी ।
ज्योतिष-गणाना के ग्रनुसार यह तिथि ३० सितम्बर, सन् १६०८ को पडती है ।
जन्मतिथि के समान ही उनकी जन्मराशि मी ग्रनिरिचत है । बचपनसेवे
सुनते आये थे कि उनकी राशि तुला है। लेकिन अब ज्योतिषी बताते हैं कि वह
वृर्चिक राशि के हैं । उनके पिता जी का नाम था श्री रवि सिंह तथा माता जी
का नाम मनरूपदेवी है। पिता के इस नाम के कारण ही उन्होंने अपना उपनाम
दिनकर' रखा । दिनकर के बड़े भाई हैं श्री बसन्त सिह तथा छोटे भाई का नाम
सत्यनारायण सिंह है। उनका अपना वास्तविक नाम है रामधारी सिह ।
'नवीन' जी हमेशा उन्हें 'रामधारी' कह कर ही पुकारते थे । अपने पिता जी की
प्रकाल मृत्यु के समय दिनकर केवल दो वर के थे । पिता की मृत्यु के पश्चात्
तीन पुत्रों के भरण-पोषण का भार विधवा मां पर ही पड़ गया, जिन्होंने श्रपनी
सारी पूजी पुत्रों की, विशेष रूप से दिनकर की, शिक्षा पर लगा दी। इसके
अतिरिक्त २० एकड़ भूमि को बटाई पर चढ़ा कर छनका काम बड़ी अच्छी
तरह चल जाता था ।मां तथा पत्नो
दिनकर के युग की भारतीय नारी की पीढ़ी अपने त्याग और संघर्ष का प्रति-
फलन तो जानती है लेकिन अपनी महत्ता और गौरव की मान्यता जैसे उसके लिए
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