भगवान महावीर के जीवन के सुन्दर अंश चिराग | Bhagwan Mahavir Ke Jeevan Ka Sunder Ansh Chirag

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : भगवान महावीर के जीवन के सुन्दर अंश चिराग - Bhagwan Mahavir Ke Jeevan Ka Sunder Ansh Chirag
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about धन्यकुमार जैन 'सुधेश '-Dhanyakumar Jain 'Sudhesh'

Add Infomation AboutDhanyakumar JainSudhesh'

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
[ विरागकलिकाओं का ल चुम्बन ,किरणो ने सम्पुट खोले।हो मारुत से संस्पर्शित ,लतिकाओ के दल्ल डाले || पनिहारिन आयी, घट ले- जल भरने को पनघट ম। भुकं भूक जब लगी इव्रोन ,कवे रज्जु बोध कर घट मे॥अबगुण्ठन तब हट जाने--से स्वण हार यों चमके |ज्यो पावस ऋतु कं श्यामल ,मेघो म विद्युत दमके ॥ आग बढ भानु-किरण भी-- उनका मुख पङ्कज दूती । माना सरपुर से आयी, बन किसी देव की दूती॥वह कुंण्डलपुर के विस्तृत ,पथ पर इस भोति विचरती।काभिनियो कमली कलियो ,प्रिसलय मेग क्रीडा करती ॥ श्रा पहुँची राज-भवन में , सुनती भ्रमरं का गाना) अतएव माग के श्रम को, उसने न अल्प भी जाना॥-- दो --




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now