शब्दार्थ चिंतामणि खंड -1 भाग-अ | Sabdrtha Cintamanih, Pratham Khand Part A

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
25 MB
कुल पष्ठ :
463
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)( ४ )४908४ ---
अकाल,यथा ॥ अनुतिष्ठन्तु कमौपि परल
कथियासव, । सब ले।कात्मकः कस्सा
टनुतिष्टाभिकिं कथमिति ॥खकलकन: । सचि ।झकलुसपः | चि ।झकस्सात् | 1 | सइसार्थे । अतकित
जिमित्तके॥ यथा | अकस्सायुवती
वृद्ध वेगरेष्वाकृष्यच्वम्बति । पलिनिदं
यमाखिक्ग्य हतुरष्रभविष्यती -
नि ॥सकाम, । चि। वाह्मविषवकासनाशू
नये ॥ नविद्यतेकामेत 5 स्थ॥ यथा ।
हष्टानुअविकाबाह्या: कालायस्थन-
सनन््तंसा । अकामस्ताढ शक्त्नन्तुनि
धासच्षेनसिध्यतीसि ॥अकामकार । पु। यर्थेष्टानाचरणे ॥
नकामक्ाः ॥अक्षामहत, । चि । माब्रह्मलेाकाम-
न्दादबौ ची नेष्वानन्देषु विष्ये ॥
कामेनहतः कामहत; । नकाम-
इतं, ॥झकाय, | वि। अशरोरे ॥ लिङ्गश्रो-| बीतदमी ॥ककिण्निमा । पु । भकिण्डन्दे ॥ भ
अरकिन्तिकरम् । चि । की स्यं भावकंअकुखसंन्नः । चरि । त्िथिवारचंवरिभे---------------- ~अकूपा
अन राधचेमारम्थषोडशर्धष भार ४
रः। यावश्चरतिवैतावदकालं मनये
विदुरिति ॥ श्रसमये॥ भि । तद्धि
शिष्टे ॥ |॥अकालटष्टि:। स्त्री | सहस्याद्रिषवंधेणे॥ यथा | पैधादिचत रे। भासान- |
प्रोक्ता रष्टिरकालजा | ब्रत यात्रा
दिक सभवर्जयेत्सप्तवासरानिति ॥ |अऋकिध्यम: । थि | ढीमे ॥ नासिति कि-জ্বল মহ্।। | सयूरव्यंसका दिक्वा|तस
मासः ॥ निष्कामे ॥किव्यमर्व भाव: | इसनिच् ॥। अपकीन्तिकरे ॥ नकी न्तिकरम् ॥;अकुष्यम । न | स्वणेरजतात्मकेधने ॥'„ „> ~कुप्यादन्पत् ॥पे ॥ यथा। स्वाक्ष्यन्तकातिवसपे
घआकगानराधादित्यप्रवाणि विष:
समास्तिथयेा $कुला स्थः | रूर्येन्ड:-
सन्दगुरबश्वेति ॥रप्नजि ते ॥ मविद्यते काग्रेयस्मस: ॥| | अकुशलस्। प्रि। अशोभमने ॥ नकुप-अकारः । पुं । भ करे । व्णानांस-च्छम् ॥ध्ये भगवित ॥ अ वयं निर्ग ॥ | अकूपारः । पु | कृब्धराजे ॥ লयत्करः ॥
1 ब1हादयै 4 कृष्य पिपत्ति । 1अकाछ: । पुं। कालाशुद्दो ॥ यथा।! खनपूरणया:। कम साय ।' पुं। कालाभुड्ो ॥ यथा। खनपूरणयेः । জল ভ্যান । खनये
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