श्रीवत्स नाटक | Shri Vats Natak

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Shri Vats Natak by डॉ. कैलाशनाथ भटनागर - Dr. Kailashnath Bhatanagar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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दृश्य १ श्रीवत्स प्‌ इंद्र लक्ष्मी की छोर देखते हैं कष्मी-देवराज शनि ने सेरा घोर अपमान किया है । इंद्र- सविस्मय दोनों कहते हो कि मेरा घोर झपसान किया. है। बात क्या है ? न बूथ शनि--लक्ष्मी ने सुझे कई अपशब्द कद्दे हैं। .. . .... इंद्र- ध्पशब्द बात खोलकर कहो | शन्ति--लक्ष्मी ने सुझे कहा है. कि जेसा तुम्हारा काता रंग है चेसा ही तुम्हारा हृदय । जैसा तुम्हारा स्वभाव वक्र है आत्मा चक्त है वेसा तुम्दारे नाम के श्रह की वक्र-गति से स्पष्ट है । इंद्र-लक्ष्मी 1 अब तुम कहो । लक्ष्मी-देवराज शनि ने मेरे चरित्र पर लांछन लगाये हैं । इसने मुफें अज्ञात-कुलजा कुलटा और चपला कहकर मेरा घोर पमान किया है। ये अपशब्द सुनने पर मैंने भी वे शब्द कहे हैं इंद्र-तो शनि पहले तुमने झपमान किया ? शनि--नहीं लक्ष्मी ने । लक्ष्सी-सही शनि से || नारद्‌-- सविस्मय यह क्या समस्या है ? नारायण नारायण 1 इंद्र शनि लक्ष्मी ्याप पर असियोग लगाती हैं छाप उच पर । बात सुलमाकर कहो । लक्ष्मी-शनि ने देवताओं के सामने कहा है कि लक्ष्मी छाज्ञात साता-पिता की संतान है स्वभाव से कुलटा है चपला है । के रद न्ट




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