भगवती आराधना (१९९० ) | Bhagwati Aaradhana (1990)ac 6418

[adinserter block="2"]
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
48 MB
कुल पष्ठ :
978
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)विषय-सूचीविषय पृष्ठसिद्धोंको नमस्कार पूवंक आराधनाकाका कथन करनेकी प्रतिज्ञा १
शास्त्रके आदिसें नमस्कार करनेका प्रयोजन २
सिद्ध शब्दके चार अर्थ |;
आराधनाकी उपयोगिता ६
आराधनाका स्वरूप ७
उद्योतन, उद्यवन दिका स्वरूप ८
सक्षेपसे दो आराधना कही हैं १०
संक्षेपके तीन भेद ११
दक्षंनकी भाराधना करनेपर ज्ञानको
आराधना नियमसे होत्ती है ज्ञानको
आराधना करनेपर दर्शैनकी आराधनाभजनीय है १२
उक्त विषयमे मन्य व्याख्याकारोकेमतकी समीक्षा १३
मिथ्यादृष्टि ज्ञानका भाराधक नही १७
नयका स्वरूप तथा निरपेक्षनयकेनिरासके लिए शुद्ध विशेषण १७
सयमका भथं चारित्र १९
संयमकी आराधना करनेपर तपकी
भाराघना नियमसे, तपको भराधनामेजारिश्रकी भाराघना भजनीय १९
अन्य व्याख्याकारोकी समीक्षा २०
बाह्यतपके विना भौ निर्वाणगमन २१
असंयमी सम्यर्हष्टीका मी ततप व्यथं २२
अन्य व्यास्याकारोकी समीक्षा २३
चारित्रकी आराधनामें सलकी आराधना. २४
अन्य व्याख्याकारोकी समीक्षा २६
चारित्राराधनाके साथ ज्ञान और दर्शंनकीआराधनाका अविनाभाव २७बिषय पृष्ठ
चारित्र ज्ञान गौर दर्शन एकहीरहै २९
चारित्रमे उद्योग ओर उपयोग ही तपदहै २९
चारित्रक प्रधानताको छेकर समाधान ३२दुःख दूर करना ज्ञानका फल दे
अन्य व्याख्यागोको समीक्षा ३४
निर्वाणकां सार अव्याबाध सुख ३५
समस्त प्रवचनका सार आराधना ३५
आराधनाकी महत्ताका कारण ३६
अन्त समय विराधना करनेपरसंसारको दीषंता ३७
अन्य व्याख्याका रकी समीक्षा ३७
समिति, गुप्ति, दर्शन और ज्ञानके अतिचार ३८
आराघना ही सारभूत है ३९
यदि मरते समयकौ भआराघना सारभूत
है तो अन्य समयमे आराधना क्योकरना, इसका समाधान ४०
उदाहरण द्वारा समर्थन ४१
योग शब्दके अनेकं अर्थं ४.मिथ्यात्व आदिको जीतकर ही श्रामण्य
भावनावाला आराधना करनेसे समर्थ ४५मिथ्यात्वके भेदोका स्वरूप और उनकोजीत्तनेका उपाय ४६-४७
मरणके सतरह भेद ४९,
सम्यग्दृष्टि गौर संयतासंयतका बाल-पण्डितमरण ५६
सशल्यमरणके दो भेद ५६
निदानक्रे तीन भेद ५६
वसटुमरणके चार मेद ५७
कषायवश आतंमरणके चार भेद ५८
User Reviews
No Reviews | Add Yours...