सर्वहितकारी वर्ष 29, 2001 | Sarvahitakaarii Varshh-29, 2001

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Sarvahitakaarii Varshh-29, 2001 by वेदव्रत शास्त्री- Vedvrat Shastriसत्यवीर शास्त्री - Satyavir Shasrti

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सत्यवीर शास्त्री - Satyavir Shasrti

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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आर्यसमाज के प्रेरणास्रोत श्री देवीदास आर्य दिवंगत कानपुर। महान्‌ महिला उद्धारक, प्रपिद्ध समाजसेवी, आर्यनेता श्री देवीदास आर्य को खोकर कानपुर মী आर्यसमाज की अपूरणीय हानि हुई है। २५ अक्तूबर २००१ को श्री आर्य की हृदयगति रुक जाने से उनके निवास पर देहान्त होगया। पूरा कानपुर आज उनके बिना सूना लग रहा है । २८ अक्तूबर २००१ को कानपुर में उनके शान्तियज्ञ मे उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री राजनाथसिह, उठप्र० के नगर विकासमत्री लालजी टंडन, आर्यं प्रतिनिधि सभा के प्रधान कैलाशनाथसिह कई संसद्‌ सदस्यो, विधायकों सहित सैकड़ो सामाजिक, राजनैतिक एवं अन्य सस्था्ओं द्वारा संवेदनाएं व्यक्त की गई । शान्तियन्न लखनऊ विश्वविद्यालय की प्रो० डा० शान्तिदेव बाला ने सम्पन्न कराया । प्रबल आत्मबल के धनी, ईश्वर-विश्वासी, निर्भीक, श्री देवीदास आर्थ वैदिक धर्म के क्रियात्मक स्वरूप कीं साक्षात्‌ मूर्तिं धे । उन्होने व्यावहारिक जीवन मे विभिन्न पहल पर अपनी अमिट छाप छोडी । उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री राजनायसिंह ने कहा कि हम सभी ने सामाजिके मेवा का जीवन्त आदर्शं खो दिया है, सेवा उनका जीवन धर्म था। श्री आर्य ने अपने निजी संसाघधनो से लगभग ४००० महिलाओ एव कन्याओ . को असामाजिक तत्त्वों तथा वेश्यालरयो के चुगल से मुक्त कराया एव सभ्य समाज मे पुनर्वासित किया । ६०० से अधिकं निराश्रित निर्धन एव उत्पीडित कन्याओं का विवाह निजी ससाधनों से स्वय पिता बनकर कन्यादान करके कराया । २००० से अधिक असहाय, निराश्रित एव निर्धन विधवाओ, वृद्धो-वृद्धाओ के जीवनयापन हेतु सरकार से पशन का प्रबन्ध केराया । चार हजार से अधिकं विधर्मियों को वैदिक धर्म मे प्रवेश कराया जिसमें पादरी, मौलवी और इमाम भी हैं। ॥ आर्य जी आर्थं कन्या इष्टर कालेज के सस्थापक, प्रबन्धक, अखिल भारतीय सिन्धी आर्य प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष, नारी सेवा सस्थान के अध्यक्ष, उ०प्र० आर्य प्रतिनिधि सभा के पूर्व उपप्रधान, उ०प्र० विद्यालय प्रबन्धक महासभा के अध्यक्ष, आर्यसमाज गोविन्दनगर के संस्थापक अध्यक्ष, राष्ट्रीय शिक्षण समिति के पूर्व महामत्री, श्री मुनि हिन्दू इण्टर्‌ कालेज गोविन्दनगर के संस्थापक थे। ‡ श्री देवीदास आर्य स्वतत्रता এ उत्तरप्रदेश रत्न से विभूषित थे। समय-समई पर प्रदेश एवं देश की विभिन्‍न सामाजिक, साहित्यिक एवं सास्कृतिक ने आपके अभिनन्दन समारोह आयोजित कर कृतज्ञता ज्ञापित की । उनमे प्ल रूप से लायन्स क्लब, रोटरी क्लब, विश्व हिन्दू परिषद्‌, सिधी सघ, सनातन धर्म, आर्यसमाज तथा विभिन्न नगर महापालिकये है । श्री आर्य के अभिदन्दन ग्रन्थ का विमोचन उ०प्र० विधान सभा अध्यक्ष श्री केसरीनाथ त्रिपाठी द्वारा कुछ समय पूर्व किया गया धा। श्री देवीदास आर्यं के दिवगत होने से उत्तरप्रदेश मे आर्यसमाज के एक युग का अन्त हो गया है। आर्यसमाज की एक अपूरणीय क्षति हुई है । कानपुर के सभी बाजार उनके दुःखद समाचार सुनकर स्वत ही बन्द होगये। --बालगोविन्द आर्य, मंत्री चुनाव आर्यसमाज, गोविन्दनगर, कानपुर प्रधान श्री देवीदास आर्य के निधन से रिक्त हुए स्थान की पूर्ति हेतु आर्यसमाज मन्दिर गोविन्दनगर के सभागार मे श्री त्रिलोकनाथ सूरी की अध्यक्षता मेँ आर्यसमाज गोविन्दनगर की कार्यकारिणी निम्नवत्‌ घोषित की गई, चसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया । प्रधान-श्री श्ुभकुमार वोहरा, उपप्रधान-श्री त्रिलोकनाथ सूरी. श्री सतोष वाल, श्री कृष्णलाल धमीजा, मत्री-श्री बालगोविन्द आर्य, उपमत्री-श्री शिवकुमार आर्य, श्री प्रकाशवीर आर्य, श्री मदनलाल चावला, कोषाध्यक्ष-श्री वीरेंद्रकुमार महहोंत्रा, स्टोर इचार्ज-श्री नदलाल सचदेव, पुस्तकाध्यक्ष-श्री राजेश चावला, लेखानिरीक्षक-श्री श्यामसुन्दर दुओं, अन्‍्तरग सदस्य-श्री मोहनलाल मकानी, श्री जाति भूषण, श्री रामलाल सेवक, श्री व्रिभुवत्त नारायण वर्मा, श्री प्रमोद आर्य, श्री प्रकाशवीर आर्य, श्री शम्मी कपूर, श्री अनिल चोपडा। “वालगोविन्द आर्य, मत्री आर्थतमाज गोविन्दनगर, कानुपर , राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित, महर्षि दयानन्द मानवता के सच्चे पुजारी थे महर्षि दयानन्द निर्वाण दिवस समारोह कानपुर । आर्य कन्या इण्टर कालेज, गोविन्दनगर के तत्वावधान मे दयानन्द निर्वाण दिवस समारोह कालेज की प्रबध्य समिति के अध्यक्ष त्रिलोकनाथ सूरी की अध्यक्षता मे मनाया गया । समारोह के प्रारम्भ मे चार हजार से अधिक छात्राओ ने वेदमत्रो का उच्चारण कर तथा विभिन्न गीत-सगीत ओर भषणो से महर्षिं को श्रद्धाजलि भेट की। कालेज के नवनिर्वाचित प्रबधक श्री शिवकूमार आर्य ने कहा कि महर्षि दयानन्द मानवता के सच्चे पुजारी थे महर्षिं के हदय मे उस व्यक्ति के प्रति भौ दया की भावना थी, जिसने उनको जहर दिया था महर्षिं द्वारा उसे ५००८- रु० देकर नेपाल भाग जाने की सलाह देना वास्तव मे दया की भावना की पराकाष्ठा है। बिहार से पधारी सुश्री ऋचा ने कहा कि महर्षिं दयानन्द ने नारियो के गौरव को बढाने का जो महान्‌ कार्य किया है उसके लिये नारिया सदैव उनकी ऋणी रहेगी । महर्षि ने कहा कि जहा नारियो की पूजा होती है वहा देवता निवास करते है । कुमारी ऋचा ने आर्य कन्या इण्टर कालेज के सस्थापक पूर्व प्रबधक श्री देवीदास आर्य का स्मरण करते हुए कहा कि वे महान्‌ महिता उद्धारक थे, उन्होने आर्य कन्या इण्टर कालेज की स्थापना करके नारियो की बडी सेवा की है। समारोह मे प्रमुख रूप से सर्वश्री गुभकुमार बोहरा प्रधान आयसमाज), बालगोविन्द आर्य, वीरेद्र मल्होत्रा, जातिभूषण श्रीमती वर्णना कपूर, कैलाश मोगा. सरोज अवस्थी, सतोष अरोड़ा, चन्द्रकान्ता गेरा, राज सूरी आदि भी उपस्थित थे। समारोह का सचालन श्रीमती राजजीत पाल ने किया तथा प्रधानाचार्या श्रीमती वीनस शर्मा ने धन्यवाद दिया । - कार्यालय प्रमुख | | वेद का टेक-मार्ग वेद का छोड्या जब से, म्हारी होगी बुरी गति सै । सार्वभौम का चक्रवर्तीं आज कीमत एक रति सै, १ २५ साल तक रह ब्रह्मचारी, करते थे विद्याग्रहण यहा। चार कोस पै न्यारे-न्यारे, पढते थे भाई-बहन यहा, सुरग बराबर बीत्या करते, गृहस्थी मे दिन रैन यरहा। | फिर वानप्रस्थ, सन्यास आश्रम, थी जीवन की तैन यहा। आज ७० साल का बूढा घरमे, होरा गधा लति सै।। २ बृढ बूढी घर से कदे, होते फिरे बिरान यहा। सरवण जैसे ६८ तीरथ, ठाया फिरे नुहाण यहा। | सौ-सौ साल के मूर्दे अवि, घर वैट्या न सराण यहा। अभ्रीका तलवे चाट्या करता. जब चले अर्जुन के बाण यहा। महाभारत पीक्ते भारत पे फिर অল্যী লা सती चै। ३ झूठे बनगे गुरु गडरिये, खोल लिए उद्योग यहा। बना पत्थर के राम और कृष्ण लाने लग गए भोग यहा। धर्म कर्म मे फसे भरम में, कति बिचलगें लोग यहा। आध्या मे बन काने स्याणे, काटण लानं रोग यहा। काटण ओर कटवावण वाला, बिल्कुल मूढ महि सै। চি: शर्म सभ्यता जति सती की कति टूटगी ड्योल यहा , बटण दबाते ही टीवी का देखों कोलम कौल यहा। ब्वाय फरैड और गर्ल फरैंड के, देखो छिकमा टोल यहा। कलबा मे फेर बन्द बल्‍बा का ५ मिनट का रोल यहा। आख দাত रहा देख ओमदत्त किसका कौन एति से।! -ओमदत्त नैन आर्य, सूबेदर मेजर (रिटायर्ड) बतरा कालोनी गानीयत- উস । 3




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