पदमपुराण | Padmapuran Vol. - Ii

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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विषयानुकसणिका 18सत्तावनवाँ प्व लंका निवापतिनी सेनाकी तैयारी तथा लंकासे बाहर निकलनेका वर्णन | ३६१-३६६ अद्ावनबँ पव नल श्रौर नीहके द्वारा इत शरोर प्रहस्तका मारा जाना । ३६७-३७० उनसठवाँ पर श्रेणिकके पूछने पर गौतम खामी दवारा हस्त-महस्त और नत्न-नीछके पूर॑भवोंका वर्णन । ३७१-१७३ सानौ पव श्रनेक रासोका माय जाना तथा राम सदम दिव्या तथा सिहवाहिनी श्रौर गर्डवाहिनी विद्याओंकी प्राप्तिका वर्णन । ৬. ও ३७४-३८४ श्केंसट्वी एच सुग्रीव और भामए्ठलका नागपाशसे बाँधा जाना तथा राम-ल्द्मणके प्रभावसे उनका बन्धन- मुक्त होना | ३८५-३८७ भासौ परववानर श्नौर रासवंशी राजाश्रोंका युद्ध, विभीषण और रावण॒का संबाद, येदव्रोकी रणोन्मादिनी चेष्ट भौर रावणे द्वारा शिका चलाया जाना । शक्तिके हगनेसे सदभणका भूत होपुथिवी पर गिर पड़ना ति ३८८-३६५ কিবা হবशक्ति निहत लद्मणको देख राम विज्ञाप करते हैं। ३९६१९ चौसटनौ पवइनद्रनित्‌ मेषवाहन तथा कुम्भक्णके मरेकी श्राशकासे राय दुखी हता ६ । लक्मणके घायल होनेका समाचार सुन सीता भी बहत दुखी हूर । एक ्रपरिचित मनुष्य द्वारा लदमणकी शक्ति निकालनेका उपाय बताया जाता है, वह अपना परिचय देता है। विशल्याके पूर्वभवों तथा उसके वर्तमान प्रभावका वर्णन कर वह रामको सान्लना देता है। ३६६-४०७ 4 पैठ पव ठस श्रपरिचिते प्रतिचन्द्र बि्याधरके वचनेसि दर्षित हो रामने दनूमान्‌ भामण्डल् तथा अंगदको तत्काल भैजा । अयोध्यामें क्ञोम पौल जाता है। अनन्तर द्रोणमेघके पास भरतकी मां स्वयं गई और विशल्याको लंका मेजनेको व्यवस्था की | विशल्याके लंका पहुँचते ही मणक वच्तःस्थलसे शक्ति निकल कर दूर हो गई और रामकी सेनाम षं छा गया । विशल्याका ्दूमणके साथ विवाह हुआ | ४०८-४१४




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