ईशोपनिषद - हिन्दी - विज्ञानभाष्य भाग - 1 | Ishopanishad - Hindi - Vigyanabhashya Bhag - 1

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Ishopanishad - Hindi - Vigyanabhashya Bhag - 1 by मोतीलाल शर्मा भारद्वाज - Motilal Sharma Bhardwaj

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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[च] क-म = इन य 1 विधय पृष्ठसंल्या विषय पष्टसल्या २५-- सेवाधर्म की महत्ता ११६ ० --पमैतखका विभाव ` १२७ २६--वर्णाश्रम की रह में ही देश का- १ १--ईशग्रजापति का त्रह्मदण्ड १२८ अम्युदय . | १२--प्मग्रचत्तक नियतिघसत्रह् १॥ २७--सन्ततुकाराम ओर शिवात्री ११७ | १३ ---ध्म का खरूपलक्षण श २८--तुकाराम द्रारा-शिव्राजी को व्णो-१२१ | १४--पमेर्ता से धर्मी कीर २२२ श्रम घमपालन के लिए आदिश १५--धर्म परित्याग से धर्मी का विनाश ,, २६--अज्ञजनों की भान्ति १२२ | १६---प्रजापति की पर्मसृष्ट है ३०--अधिकार सिद्ध कम परित्याग १२३ | १७--अद्म-क्षत्र-विड्वीय १२० मे दण्डविषान . १८--व संचालना् धर्मसूत्र রী विषयोपसंहयर | १९--धर्मतप्रतिपादक धममश्ल ›! ९ च = 1 २०---धर्मस्थ सूछमा गति; १३१ कृतन्त्र म पमनाद २१--धर्मप्रवत्तक ऋषिग्राण हे द मन्त নি ३ २२--ऋषियों का आनन्त्य के ३----गहना कर्मणों गतिः १२४ | रर्--षमका वेवष्य ध २---विद्यासमुद्चित निष्काम की. १२५४५ | *৪ ই ओर अगिरा का तप गा ३---विद्यासमुचित प्रइृत्तिकर्म २५ --ओजखिता प्रवत्तक वसिष्ठप्राण )). এ 1 ४---विदयानिरपेद् प्रदत्तिततकम.. 9» | ^ ६-- वसिष्ठपत्नी अनुसूया ` कं ५---शाब्वविरुद्ध कर्म „, | २७ --पातक पुलस्प्राण ` १३१ ६----अविहिताग्रतिषिद्धकर्म व्यवसायशक्तिग्रवत्तक दक्षग्राण (= ११ र ७---्रा्कम्मे १२६ २ ८--च्ष्यवसायप्रवत्तक कतुप्राण ,, ८---्म्रा्यकरम ५ | २६--रेपकारडति प्र अगस्यप्राण } ६----सामाजिक कर्मों में धामिककर्मों ,, | रे ०--पुरेधिताभ्रवत्तक कश्यपप्राण # की प्रधानता - | ३१--विद्याग्रवत्तक श्युप्राण के




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