नेलसन | Nelsan

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Nelsan by अखौरी कृष्णप्रकाश सिंह - Akhauri Krishna Prakash Singh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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वाल्थावस्था और वंश-परिचय । ४ ~~~ ~~ সং পপি +^ ~^ ~ ~~ ~~~ भावोने प्रेरणा को । नेलसनने अपने बड्डे भाईसे पिताके यहाँ एक पत्रों लिखनेके लिये बिनती को श्रीर जहाज़में नौ- करो करने को उत्कट श्रभिलाघा प्रकट कौ । एडमण्ड नेलसनका स्वास्थ्य इन दिनों अच्छा नहीों था, अतः वह जल-वायु वदलनेके ख्यालसे बाध्य ( 3०४0) ) अषचरमें रहता था; वीं पुत्रकौ चिट्ढो पहुंचो। उसने होरेशियोको आमन्तरिक अभिरुचि जानकर और अपनो आर्थिक दशा उक्तम म देखकर शोघ्रहो अपनो अनुमति देदो । पिसा पुत्रको प्रक तिसे भलो भॉति अभिज्ञ था और सदा कहा करता था कि होरेशियो जहाँ रहेगा वहाँ हो सर्वश्ृछ होगा । एडमण्डने शोप्र एक पत्र कप्तान खकलिड़-की इस विषयका लिखा । कप्तानने उत्तरमें यह लिखा कि यद्यपि बिचारा होरे- शियो बहुत टुबल है तथापि उसका मन भट्ट करना उचित नहीं है अतः उसे भेज दो ; परन्तु भय केवल इस बालका है कि कहीं पहिले हो युद्धमें उसका सस्तक गोलेसे उड़ न जाय । पाठक ' इस उत्तरसे आप समझ सकते हैं कि, होरेशियो को नाव्य-विद्या-निपुण बनानेको इच्छा कप्तानको कदापि नहीं थो। यद्यपि नेलसन शरोरसे अत्यन्त दुबंल और रोगो था; तथापि भविष्य-गोरव, इठ-संकल्य और उदारता जो उसके भावो जोवनके सबसे बड़े उद श्य रहे, उस समय भो भपना झाभास दिखाये बिना नहों रहते थे भोर क्यों रहे ? क्या वाब्यकाल हो भविष्य-जोवनका अरुणोदय नहों है?! क्या




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