समाजवाद क्या है ? | Samajvad Kya Hai ?

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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1५51उसे दुछभ जीवनसंगिनी भी मिली थी। लन्दनमें रहते हुए माइसने अपने जीवनकी अमर कीर्ति समाजतंत्रवादकी वैज्ञानिक प्यास्याफे कार्यमें मन छगाया। प्रिटिश म्यूजियम प्रतिदिन लगातार कई पष्टेतक अविराम परिम करनेके बाद उसने अपनी वृहत्‌ पुस्तक ५८४७४४४!” की रचना समाप्त की । यह “केपिटल” पुस्तक आज भी सारी दुनियामें बड़े आदरके साथ देखी जावी है और समाजवादी तो घर्मपुस्तकके समान श्रद्धाभावसे इसका अध्ययन বি)मकैपिटल पुस्तक चार खण्डॉमें विभक्त है। माने केवल प्रथम खण्डक्ी द्वी यथार्थ रूपमें रचना की थी; बाकों खण्डोंको एम्मेल्सने माय्सके विभिन्‍न लेखोंसे संप्रद करके प्रकाशित किया! १८६७ ई० में “कपिटलछ” के प्रकाशित द्वोनेफे पहले ही भाफ्सका অল (71756 [78615010721 प्रथम अन्तर्राष्ट्रीय संघ! फे साथ स्थापित हुआ । मास्व इतरे सस्यापकमिं अन्यतम था ! दसी उपर उसके प्रथम घोपणापव्र { ‰129;{६540 } की रचवनाका भार पढ़ा और साफ्सने अपने मठानुसार इस घोषणापत्रकी रचना फी । बादमें प्रुधन और याङ्निनके साथ माक्संका मतभेद द्वोनेफे फारण अन्तरराष्रीय श्रमिक संघर्में कार्यकी अपेशा आत्मकलदइ दी विशेषरूपमें घलने छगा। इस आत्मकछदफे फलस्वरूप द्वी १८७५ ईू० में इण्टरनेशनल” का अस्तित्व लुप्त हो गया। इसफे घाद १८७३-७८ ई० में जय माक्स *केपिटछ” का दूसरा सण्ड प्रा- हिव करके लिये व्यस्त द्वो रद! था, उसी समय टोगाहान्त




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