महाभारत भाषा | Mahabharat Bhasha

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
67 MB
कुल पष्ठ :
113
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)आश्रमवासपव् | १३काश सदेव चक्रे समान रषि पडता है । महराज ! तम सदेव न्याय के
अनुसार नाना प्रकार के खजाने इकट्ठे करनेका उपाय करे ३५ और विपरीत
कमं त्यागो । जो मनष्य राजाओंके छिद्र चाहनेवाले ओर शज्न हें दतोंके द्वारा
उनका भेद लेकर ३६ विश्वस्त मनुष्यों के द्वारा दरसेही उन्दं मखादो । हे
कौरव ! तम कमं देखकर सेवकों को नियत करो ३७ न्याय से कम करनेवाले
अधिकारियों से राज्य के कारये पूरे कराओ । म्हारी सेनाका अधिपति दट््रत
रखनेवाला ३८ श्र, दुःख सहनेवाला, शभवचिन्तक और भक्त मनुष्य हो । हे
पारड ! सब देशवासी कारीगर आदिक तुम्हारे कर्मो को शीघ्रतापवेक अपने
धनके अनुसार करें । अपने नोकरचाकर ओर शत्रुओं में अपना ओर शज्र
का छिद्र ३६-४० तुमको संदेव देखना योग्य है । अपने कर्मो के उद्योगी
देशवासी शमचिन्तक मनुष्यों की 2१ उचित उपायोंसे तुम चेंटेके समान रक्षा
और कृपा किया करो | हे राजन ! ज्ञानी राजाकों गणग्राही मनुष्यों का गण
प्रकट करना उचित है । पर्वंतके समान अपने कमेपर उन लोगोंका नियत
करना तुमको उचित है ४२-४३ ॥
इति श्रीमहाभारतेआश्रमवा सकेपयेणि पश्चमोड्थ्यायः ५ ॥खठा अध्याय ।घतरा्ट बोले कि हे भरतषभ ! अपने ओर शत्र के सष मरडल (দিস,
मध्यस्य योर उदासीनो के मण्डलो ) को जानो १ हे शब्ञ्को जीतनेबगाले !
आपने शत्नकी ओर के शत्रु मित्रादिक चार राजाओं को भी जानो। मित्र
ओर उप्तका भित्र भी तुमको जानना योग्य हे। उसी प्रकार मन्त्री, देश,
नानाप्रकारके गह और सेनाएं भी जानने योग्य हैं क्योंकि उनका विरो-
धादिक इच्छाके समान होता है २-३ हे कुन्ती के पत्र ! राजाओं के विषय-
रूपी विरेधादिक बारह हैं और मन्त्रिप्रधान गुण बहत्तर हैं » नीति के
पे ज्ञाताओं ने इसे मण्डल कहा है । उनमें राज्य की रक्षा के छः उपाय। उसे समझता भी योग्य है ५ हे महाबाहो ! वृद्धि, क्षय और स्थान उन
पत्तर गणेकि द्वारा जाननेके योग्यहं। राज्यकी रक्षासे उत्पन्न उपायों से छ
गए जानने योग्य हैं ६ जब अपना पक्ष प्रबल और शज्नका निबेल हो तब
নন নিম্ন कर राजा विजय पानेके योग्य है ७ जब शत्र प्रबल ओर अपना
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