श्री वर्तमान जिन चतुर्विंशतिपूजाविधान | Shrivartaman Jin Chaturvinshati Pooja Vidhan

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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[३] । फल मोक्ष मिले स्हाराज,अमूँ ना जम्तं केभी ॥८॥ ऊंडों श्रीचोबीस जिनेन्द्राय मोन्षफत्नप्राप्ताय फलम निवेपामीतिखा० जल चन्दन अक्षत फल, नेवज तासु मिला । ले दीप धूष अनुकूल, मेल फल अधघे जना ॥ चोबीसों. श्रीजिनराज, भव दधि पार करो । निज पद दीजे शिवराज, भव आताप हरो ॥६॥ ९ ^~ ५ अदी भीचोवीस जिनेन्द्राय अनधेपद्‌ श्राप्ताय अघ नि्पामीतिस्वाहा জহালাতী । भव मँवर सांहि अनादिसे मे खुब गोते खा रहा । अवलम्ध देहि निवार स्वामी चरनमें सिर ना. रहा ॥ मिध्यातवश शुभ घ्म छाँडा भूल सुधि तुम पद गया । नाथ अब तुम शर्ण आया कीजिये मो पर दया॥१॥ भावना ऐसी हो मेरी तप अत संजम आदर । कमं के फम्दे से हट कर ध्यान निज आतम कर ॥ ज्ञानदीपक हो प्रकाशित तिमिरका नाशन करू ! कामना मेरो हो प्री जाय शिव श्मणी वरू ॥२॥ इस काज प्रभु तुम चरणकी में आनकर पूजा रची । रघु.




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