सूर विनय पत्रिका | Sur Vinay Patrikaa

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
15 MB
कुल पष्ठ :
338
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)[ १० ]पद पद-संख्या
भवसागर मैं पेरिन लीन्हौ ' * २४०
भावी काहू सौं नयरे *** २७८भंगी री3 भजि स्थाम-कमल-पद १३९
भमমন? तोसों किती कही समुझाइ ११७
मन तोसों कोटिक बार कही १२४
मन-बच-क्रम मन$ गोबिंद सुधि
करि ` ११२
मन बस होत नाने मरे - -* २१७
मन रः माधव सौं करि प्रीति १२५
महा प्रभुः तुम बिरद कौ लाज १६५
माधौ ज्» जौ जन तै निगरे १७१
माधो जू; तुम कत जिय
बिसरथौ १ *** २०३
माधौ ज्? मन माया बस कीन्हौ ५४
माधौ जू मन सबही बिधि
पोच ०००
माधौ जू मन हट कठिन
নী ° १५९
माधो ज्, मो तैँ ओर न पापी १८९
माधौ ज्? मोहिं कि की टज १९७
माधौ ज्, यह मेरी इक गाई ६५
माधौ ज्? सो अपराधी हौ ` ` * १९८
माधौ ज्? हों पतित-सिरोमनि २०७१६२१पद पद-संख्या
माधौ, नैङकु हटकौ गाह ६४
माया देखत ही जु गद *** ५८
मेरी कौन गति बजनाथ ` ` १७५
मेरी तौ गति-पति तुम, *** २३५
मेरी बेर क्यो रहे सोचि ˆ २१०
मेरी सुषि लीजौ होः बजराज २७०
मेर हृदय नाहि आवत हौ, २६८
मेरौ मन अनत कहाँ सुखपवि ° ३००
मेरौ मन मति-हीन गुसाई ˆ “ˆ १६२
मे तौ अपनी कटी बड़ाई ** २१८
मो सम कौन कुटिल खलकामी ““* १९५
मोसी पतित न और गुसाई १९४
मोसी पतित न और हरे २०९
मोसोी बात सकुच तजि
कहिये *** १८५
मोहन के मुख ऊपर वारी' * ३०
मोहि प्रभु तुम सों होड़ परी *** १७९ययह आसा पापिनी दहै -* ६१
यहई मन |! आनंद-अवधि सब॒ ७७
यह सब्र मेरीये आइ कुमति १०१
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