जातक | Jatak

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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[ १३ 1आत्मा नाम का कोई नित्य ध्रुव, भ्रविपरिणाम स्वभाव वाला पदार्थ नही है । कम से तथा (अ्रविद्या श्रादि) क्‍लेशों से अ्रभिसंस्क्रृत पञचस्कत्ध मात्र ही पूर्व-भव संतति क्रम से एक प्रदीप से दूसरे प्रदीप के जलने की तरह गर्भ में प्रवेश पाता है।इसी प्रकार राजा मिलिन्वः ने महास्थविर नागसेन से प्रश्न किया--- यदि संक्रमण नही होता तो पुनर्जन्म कंसे होता है ?हाँ महाराज, बिना संक्रमण हुए पुनजेन्म होता है ।१. भन्ते, सो कंसे होता है ? कृपया उपमा देकर समभावं ।महाराज ! यदि कोई एक बत्ती से दूसरी बत्ती जला ले तौ क्या यहाँ एकं बत्ती दूसरी मे संक्रमण करती हं ?नही भन्ते !महाराज ! इसी तरह विना संक्रमण हुए पृनजैन्म होता है ।२. कपया फिर भी उपमा दे कर समवे ?महाराज | क्या आपको कोई इलोक याद है जो आपने अपने गुरु के मुख से सीखा था?हाँ, याद है ।महाराज } क्या वह इलोक ग्राचाय्यं के मुख से निकल कर आपके मुख में घुस गया ?नहीं भन्ते !महाराज ! इसी तरह बिना संक्रमण हुए पुनजेन्म होता ह ।भन्ते ! श्रापने मरच्छा समाया ।फिर राजा बोला--मन्ते ! एसा कोई जीव हं जो इस शरीर से निकल कर दूसरे में प्रवेश करता ह?नहीं, महाराज ।` रूप, वेदना, संज्ञा, संस्कार, तया विज्ञान । ` राजा भिलिन्द का समय ई० पु० १५० है । `श्रात्मा का एक शरीर को छोड़ कर दूसरे को धारण करना।




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