मध्यदेशीय भाषा ग्वालियरी | Madyadeshiya Bhasha Gawaliyari

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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विपय-सूची समपण (२) दो शब्द--डॉ० बासुदेवशरण (५) प्रस्तायना--श्री राहुल साकृत्यायन (१२) निवेदन (प्रथम संस्करण) (१३) कतज्ञता ज्ञापन (प्रथम पुनमु द्रण) (1৩) विपय-सूची (१६) प्रारम्भिक १-१० अ्रपश्नशों का प्रादुरभावि प्राचीन हन्दी--रूपमेद- ग्वालियरी भाषा--पाडे जी का मत--शहूल जी का मंतद-- ग्यालियरी और ब्रजमापा- ब्रजमापा झौर बुन्देलखण्डी आदि नामों से उत्पन्न 'अत्रर--मध्यदेश की भापा के विकास के अब्ययत की झावश्यकता 1 मध्यकालीन मध्यदेश ११-१६ मच्यदेश विषयक श्रान्त धारगाएँ--मध्यकाल वा मध्यदेश--राजशेख र---सोमदव शौर मेस्तुड्ू--क ल्याण सिंह का श्रनगरग तथा ग्न्य ग्रन्थ--केशवदास--फ्कीरल्ला सैफसा का मध्यदेश--सुदेश-- नावभटु-- बना रसी दास जैन--बुन्देलो को क्षेत्र--म्रध्यदेश का विघटन--भाषा के विवेचद पर प्रभाव | मध्यदेश ओर ग्वालियर २०-२६ भापा का केन्द्र--फ्कीरहला का सूत्र--त्रीसलदेव रासो- जागनायक--तो मर भौर हिन्दी-वनही--ग्वालियरी माप्रा 1 हिन्दी की प्राचीन परम्परा ৮৩-হল গরথসহা धौर देशी भाषा--अवहृदु--भाषा--मध्य- दरशीय अपकश्षज्ष--मरध्यदेश की भापा--बनारत्तीदास जेन-- नावभट्ठ--शोरसे की भाषा--वालियरी भाषा--वालियरी का ग्रध+हितोपदेश--दक्षिए में ग्वालियरी-नामायजीकी जन्मभूमि खालियर थी--जयकीधि---ब्रजमापा ! ४ १६...




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