चट्टान और सपना | Chattan Aur Sapna
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
145
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)'फिक्र मे डूब गई हो, “यह सव एक लम्बी कहानी है। क्या में तुमसे
अभी मिलने आ सकता हूं ? ”मैंने कहा, “मैं तो शहर से बहुत दूर जुहू में रहता हूँ । मगर हर
रोज़ दोपहर को मैं शहर आता ही हूँ । ऐसा क्यों न कर, किसी रेस्तरां
में इकट्ठे लंच खाएँ। अब यहाँ वम्बई मे भी तुम्हारा लखनऊ की
तरह एक भेफयरः रेस्तरां बुल गया है ।प्रफेयर ?” उसने रेस्तरां का नाम ऐसे दोहराया, जैसे किसी ने
अचानक उसके चुटकी से ली हो, “नही-नदी, भै तुमे किसी रेस्तरां
मे नही मिलना चाहता । वहां वहुत-से लोग होते है । हम भाराममे
बात नही कर सकेंगे ।”“अच्छा,” मैंने कहा, “तो तुम यहाँ ही आ जाओ , मैं तुम्हारा
इंतजार करूँगा, कितने बजे आओगे ?”“जितनी देर में टैब्सी को चचंगेट से जृह पहुँचने मे ठाइम
लगेगा ।''“कोई चातीस-वयालीस मिनट अपने वरामदे मे खडा
मिलूँगा।” फिर मुझे कुछ याद आया ओर मैंने कहा, “अरे भाई लक्ष्मी
भी साथ है तो उसे भी लेते आना--भाभी के दर्शन”'***एक वाक्य
फिर मेरे दिमाग मे गूँजा और मैंने कहा, “हम तुम्हारे रकीव नही है,
यार।/मगर उधर से कोई जवाब नही आया, टेलीफोन का सिलसिला
'पहले ही कट चुका था ।अगले पंतालोस मिनट तक पच्चीस बरस पुरानी तस्वीरें मेरे दिमाग
में उभरती रही ।बिरजू হতविरजेन्द्र ***विरजेन्द्र कुमार सिंह***कंवर विरजे कुमार सिह“वापसी का टिकट / 17
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