जैन तत्व निर्णय भाग 1 | Jain Tatva Nirnaya Bhag 1
श्रेणी : धार्मिक / Religious

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
5 MB
कुल पष्ठ :
258
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)[২, प्र०--मिद्ध भगवान कहा रहते है ?০
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०१९१२९ष्ट१५उ०-मिद्ध्षेत्र मे)प्र०- सिद्ध क्षेत्र कहा पर है ?उ०-छोक के शिरोभाग पर व अलोक के नोचे ।प्र०-- श्री सिद्ध भगवान के हाथ कितने है ?उ०्-एक भी नही है ।प्रः--सिद्ध भगवान यहा कवं आवें ?उ०-यहा नही आवें, क्योकि उनको यहा आने का
कोई कारण ही नही है ।प्र०-भरिहूत देव का अर्थ क्या है ?उ०--कर्म रूप छात्रु को हनन करने वाले देव याने
पैवलज्ञानी ।प्र०-फर्म फ्रिसे कहते है ?उ०-जीव को जो घारो गति में रुछाता है और समार
फे चुस-दु ख का मूल कारण है, उसको कम कहते हैं।प्र०-पर्म कितने प्रकार के है व कौन-कौन से हैं ?उ०--आठ प्रकार के, ज्ञानावरणीय, दर्शनावरणीय, वेद-
नीय, मोहनीय, आयुष्य, नाम, गोत्र, अन्तराय ।प्र०-फर्मों को तुमने देखा है ?उ०-नही, अपन उनको नहीं देख सकते है ।प्र०- तुम्हारे पास कितने कर्म है ?ভত্- সাত ।प्र०--सिद्ध भगवत के पास फितने कर्म है ?उ०-एवक भी नहीं ।प्र-भरिहत देव के पास किलने कर्म है २उ०-चार দম ।
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