गुरु गोविन्द सिंह के दरबारी कवि | Guru Govind Singh Ke Darbari Kavi

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Guru Govind Singh Ke Darbari Kavi  by भारत भूषण - Bharat Bhushan

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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विषयानुक्रम प्रथम अध्याय गुरु गोविन्द सिह : युग, जीवन और व्यक्तित्व १. कवि और युग-चेतना १७ २. गुरु-परम्परा ओर समसामयिक शासक तथा उनका पारस्परिक सम्बन्ध २० ३. राजनीतिक परिवेश २२ ४. आध्यात्मिक परिवेश + २४ ५. सामाजिकं परिवेश २८ ६. पंजाब का साहित्यिक परिवेश ३० (फारसी साहित्य, गुरुवाणी ओर आदि ग्रन्थ, कच्ची वाणी) ७. ब्रज-साहित्य की तत्कालीन परम्पराएँ और पंजाब में उसका परिवेश ३६ ८. गुरु गोविन्द सिंह का जीवन और व्यक्तित्व ४२ (प्रारम्भिक शिक्षा-दीक्षा, वीर योद्धा, योद्धा-भक्त, सन्त एवं समाज-युधारक, राष्टृ-निर्माता, तासमन्वयवादी दृष्टि से सम्पन्न महामानव, कवि-व्यक्तित्व, कवियों के आश्रयदाता एवं सहृदय ) द्िलीय अध्याय गुरु गोविन्द सिह के दरबारी कवि १. पंजाब के दरबारी कवियों की परम्परा ५५ २. गुरु गोविन्द सिंह का दरबार ५७ ३. दरबारी कवियों की संख्या ५६ ४. नामावली के वे कवि जिनकी रचनाएँ उपलब्ध नहीं हैं. ६३ ५. वे कवि जिनकी रचनाएँ पंजाबी या फारसी में हैं ६३ ६. वे कवि जिनकी केवल फुटकर रचनाएँ उपलब्ध हैं ६३ ७ * वे दरबारी कवि जिनके सम्बन्ध में सभी सूचियाँ सहमत हैं. ६४ २३-४४ १७ ४००७६ ५१५




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