बाल रामायण | Bal Ramayan

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Bal Ramayan  by रामजीलाल शर्मा - Ramjilal Sharma

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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याला । | प्र राम ने प्रपते অন্ত फा चिक्ला जीय फर सष शोर से ठंकार दौ । चिल्ले से टू फरफे एक घड़ी भारी आयाक्ष निकली । उस टंकार को सुन कर जगल फे सष আাননহ শ্রীঙ্গ ঘড়ী। टंकार को खुग फर ठाडइ़का भी पहले ते चौंफ पड़ी । मगर अप पास दी आदमियों फे देह की छुग घ पाई-सध षष्ट सट निकष आई। राम-सतदमया को वेखसे दी धेने दाथ फैला कर, मुँह फाड़ फर, चप्‌ उमफो खाने फे लिए दौड्डी । सथ राम ने ऐसे याण मारे कि वाढ़का के वेषे फान জাত गये । स्र्दमण फे तीर से उसकी नाफ फट गई। तय से! यह स मालुम कहाँ साग फर छिप गई और छिप कर ही देने साश्यों पर घड़े पड़े पत्थर फेक फोफ कर मारमे खगी | पर घहद कर्हासि मारती थी यह न देख पशा। तयते जिधर से साङ्का फी भाषास पाते, सम शषम्रण उधर ही तीर चखक्ञाते । यह सीर, षद तीर, तीरे पर तोर, मारे तीरो फे पाने मायो ने राड़का का नाक में वम फर दिया । ताडका ने कमी पतने सीर न লাম খা! श्न हीरो की यैर फे छ्ामने मला यष्ट धिप फर कय सश रष सकफतो थी । सीसे से घायल दाकर यष घबरा उठी | अब फिर सामने म श्राती ता फया करती १ खसका फिर सामने झाना था कि रास में एक तीर से सका काम समाम कर दिया 1 षष्ट धड़ाम से घरती पर गिर कर मर सई। ইরানী राज़कुमारों की यहादुरी देखकर घिश्ामित्रजी ৮ हक




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