कोक शास्त्र भाग - 1 | Kok Shastar Part-i

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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प्रथममाग ।- २३ . से दत्पन्न हुआ पत्र अपनी माता के प्रांत दो अतुरागी हुआ १ इसी पछेये महात्मा क््टाप जाग निदाह सस्वन्ध म मलुध्या के कल्याणाये इतना सम ।घचचार करगय हें । उनका वात हमका मलप्रकार मानकर घ्बलना चां द्िये . यदि उनको वात न मानकर हम अपना इच्छा लुसार. युचति शवदाएं ।वघवा वदाह सगान्ना आर खमवरा _ चिंचाह संसग करेंगे तो निम्शय ही संक्रामित विष दोपसे अकाठमें सुत्यु के हाथ पढ़ें ग। वत्तेमान में इसके दृष्टा्त अनक इं जोर एसें ढुए घिचाद से उत्पन्न हुई सस्तान शी मनेक दे।पा से आकज्ञान्त होकर गति को नीचे रिरावेगी । इस खमय अनक जिज्ञासा करसक्ते दे के उक्त प्रचन्ध में जो कुछ गण दोष कहा गया है चेह खब सखग से होता हे किन्तु संसमे कया पदार्थ हैं उस में कया खक्ति है उसक दोष राण हम . किस प्रकार जान सकते हैं सो थी समझा देना उचित हे । यह चात ठीक है आज में इस बात के बताने मं यथा साध्य चष्टा करूंगा कि ससग का कया माहात्स्य हे । संसगमाहात्म्य ॥। ससग माददात्स्य की व्याख्या करने स पहले अपने पाठकों को पक प्रा्यान कथा सुनाते द-- पक पाधथक मार्ग में वायु और मेघसे अत्यन्त पीड़ित दाकर वह्ती अनसन्घान कर रहाथा । उसने मागे से कछ दर पर पक यृूहस्थ का घर देखा अपने प्राण की रक्ता कं लिमत्त बह उस घर से चला गया । चादर के घर में जाकर घहां घरी हुई चस्तुओं को यो दुखकऋर उखतने जान लिया 1कि य्द किसा चमार का घर हे तो भी घह कछ उपाय न देखकर उसी घर के भीतर चलागया 1 पथिक ने भीतर जाकर देखा 1क एक छप्पर के वांस में लोहेका पीज्रा टेंगा शा है उसमें पक तोता चैंठा हैं । तोतेन पाथिक को देखते दी जपरीं साँखें लाल करती और कंठोर शब्द से वोछा कोन है हू भाग साल यहां से साले चोर भाग पांधक ब्राह्मण था चह का 2 पर्ची फ कठोर शाध्द न सह सर तथा उत्ती समप वदह्दांस ला गया । . फिरलते चलते कछ दूर पर उसका और एक स्पान मिला उसे स्पान पर घह जया पहेंचा तब उस को काना मे एएक अत्यन्त सतादर - शंदर साइ्य सद्दाशय किघर से साना हुआ ? सापकं दशन क. निकजनत फपनिलीयस पी है कक कडतनाननधलडि पक नरपहपवललपनलग नकारना १ सातर या कामयत हशत्मां मां पातंत्रतामू चलालयारंन धमप्याय




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