नारी मन | Naari Man
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
3 MB
कुल पष्ठ :
180
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)वहया/15गरम करवे पिलाया दोडकर मुहल्ले व वैद्यराज स दवा लाबर
पिला दो--'लेदिन अशोक ! तर दम तो है नही र। डेंढ पसली
का है. उस मुए कल्लन से का भिठ गया र 1” चदा न जशाव स
पूछा ।अशोक न अपनी दद नौर आआनुञजा से लाल अणे वोली--
'बल्लन तुम्ह गाली दे रहा था मा। उसने तुझे उसने तुये
अशाव उत्तेजना से कापने लगा था--“उसने तुझे छिनाल कहा मा ।
बेहया कहा बापू को भी गाली दी तो मैं सह गया लेक्नि तरी
गाली नही सहमा । अच्छा मा, तू ही एक वार वह दे कि तू
बेहया नहीं है--मैं मान लूगा, चाह फिर हर कोई कहता रह ।*और अशाक के प्रन वे उत्तरम 'बेहया” चादा पहली बार
आचल से मुख ढापकर फट फटकर राने लगी थी ।
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