हस्तलिखित हिन्दी ग्रंथो का चौदहवाँ त्रैवार्षिक विवरण | Hastalikhit Hindi Grantho Ka Chaudahavan Traivarshik Vivaran

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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६५3 হত লাম পয लिपियाए पिपय ७--४यीरगी के पद और मायादि फी निस्पारता भौर प्रषटनान र्गपिर्या १६५३ ६० सबधी पर 1 ८->ऊयीरजी के यचन এ एयर षी सा, भि तथा भारमापद्न । <4--प यार सुरतियोग € হাতা হয়া युधिष्ठिर संयादुे मिस মাচা হা মাধ रुप प्रराशत | १०--ररग्दापटी > सृष्टि फी उत्पत्ति, यूमावतार और उसका विगर राथा प्रल्यादिफं साप उर इ पर्म+\ য়ন ; फ्यार मत-संयधी उपदेश । १२०--रखता भ प्पीरपय संप॑पी उपदन । १३.--सापु-मादारण्य >€ माु-मादारम्य, पारश्नी, शुरतिषारितः गुरनमादारग्प भादि १३४ पा पण। १४८-- सुरति ष्ट सवाद्‌ ৮ মথ ঘনা ছা লশ্া। দলশান ण्यं অশযাশিফশজ । १५ प्यास गुर ॐ श्यामो फा पणन भर मा उपदन । १६-परिष्ट गाष्टी ৮ जीय, मावा, व्रद्न तया च्दादि मे सबंध में बरिष्ट फा शगमिषता दियारर गिन मत वी মহা সহী মলো। दनम से स्या ३,४,५,८,९,१३ तथा १६ दे सात प्रय ग्य मे (पीत हैं । संप्या २ ( फन्यीशर, रान्यानर रमैयी ), ११ ( रमेगी ) भर ७ ( पद ) या ऐोइबर अन्य प्रायों में कुछ भी फ्यार की रचना ६ एसमें सदृंद है । पयीर फे पाम पर उनके अयु यावियों न पूय अर्यों फी रचा। फी ६ । दुघाय्रय पौराणिक स्यक्ति हैं, বাচা বাঘা ই আগ হারাঘ ( दधात्रय गाष्टी ) गदत दी है। पैस ही गारपगोष्टी भी । फ्योंशि गौर भौर कयीर के समय में शतारिदयों या चतर ६ । वपा दत शाणः पै रघयिता लोग भप समय तङ कै मतो फी 'द्याण प्रयये भादि म पुरातेद) रखया५ शूला भादिसे ठेर एक माम साय ( सगमग ए० सद्‌ १८१९--१८४४ तक ) के मद्दतों वी दया पुरारी गई है । सख्या १० कुरग्दावसी में धमदासी হারা ই महत भमोत्ताम सुरती साप पे ( एगमग ६० सन्‌ १७६४ से १८१९ तर } द्या पुरारी गड ६ । सभवत यद उदों के समय वी रचा दोगी । ये ग्रंथ १८ यीं शतादी से पहए के यहीं जात पढ़ते | सएया ७ নী ই ধহ আত सासिया” यहुत मदण्वपूर्ण हैं | इसरी प्रतिलिपि किसी पैसोदास ने सवत्‌ १७१० वि० अपाढ़ पूना की की है । परतु तो” में शन्वेषय ने छिपि कराए ने जाने किस आधार पर सबत, १६६६ दि० यताया दै। संभवतस्मंथ्‌ पे पिसी भश में यद तिथि भी दी गई ष




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