वेनिटी फेयर या माया मरीचिका | venti fair ya maya marichika

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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भागे [११ मे जां वालजां ने प्रजातन्त्रवादी जनता का साथ दिया और युद्ध में भाग लिया । इसी सिलसिले में उसने अपने चिरशत्रु, जालिम पुलिस अफसर जाबर के प्राणों की रक्षा की । इस घटना से जावर का मनोभाव उसके प्रति बदल गया, और वह जां वालजां को श्रद्धा की दृष्टि से देखने लगा । सब प्रकार के भीषण खतरों से कोज़ेत को सुरक्षित रखने में सफल होने पर भी एक खतरे से वह उसकी रक्षा करने में स्वभावतः निपट अससथे रहा। वद्द खतरा था मानव-हृद्य की सहज मनोदृत्ति--प्रेम । वह जानता था कि किसी भी सुन्दरी और सहदय तरुणी की आत्मा प्रेस की काव्य-कलनासयी आकांक्षा से खाली नही रद सकती ; पर साथ दही यद्द बात भी निश्चित थी कि उस प्रेम की सार्थकता के परिणामस्वरूप कोज़ेत को उससे सदा के लिये अलग होना पड़ेगा । मारियस नाम का एक युवक एक बेरन का लड़का था । उसका पिता मर चुका था, पर उसका दादा जीवित था। बुड्ढा अपने एकसात्र पोते को बहुत चाहता था ; पर चूंकि वह राजवादी था और मारियस श्रज्ञातस्त्रवादी, इसलिये दादा और पोते में अनवन हो गई थी । मारियस ने एक दिन कोज़ेत को एक पाक से देखा था । तबसे प्रतिदिन उसी पाकें में दोनो एक-दूसरे से मिलने लगे“ थे और दोनो में आपस में घनिष्ट प्रेम हो गया था। क्रान्ति के युद्ध मे सारियस घायल होकर बेहोश हो गया था । जां वालजां उसे चुपचाप अपने कन्थे में रखकर विपदक्षियों की दृष्टि से उसे बचाने के उद्देय से जमीन के भीतर एक चहुत गहरे और मीलों लम्बे नाले के भूलभुलैया चक्कर से होकर उसे ले गया और अन्त मे उसके बूढ़े दादा के पास उसे पहुँचा दिया। सेवा-युश्रघा करने से जब वह चंगा हो गया, तो बुडूढ़ा सब वैसनस्य भूलकर अपने पोते के प्रति अत्यन्त सदय हो उठा । कोज़ेत के समान एक अत्यन्त




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