तीर्थकर महावीर और उनकी आचार्य - परम्परा | Tirthakar Mahavir Aur Unaki Acharya-parampara

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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४. आचायतुल्य कोन्यकार एवं ऐखक द चपुथं भामम्‌ उन जेच कव्यिकारों एव अच्य-ऊेखकोक। परिचय निबद्ध है, जो स्व4 जाचाय न होते हुए भी आनचाय॑ जेसे प्रभावशाडी अन्थकार हुए | ब्मे चार ५र०छप है, जिनका प्रतिपाच्-विपर्थ अधोजिखिप्त है प्रथल परिच्छद ; सस्कुृत-कर्षि भर प्रेच्चलखक इसमे परभेष्ठि, धत>जय, असग, हुर्िचिन्द, चामुण्डर।4, अजिदसेच, विंजय- पर्णी आदि तीस सर्कृत-कवियों एवं अच्यरेखकोक। व्यक्तित्व एवं कुपतित्व 1 ই ह्ितीय परिच्छेद : अपश्रंद-कवि एवं लेखक इस परिच्छरमे चतुमुख स्वयभूरेष, विभुवत सवथसू, प्रण्पदन्‍्त, घेनपाल, धवछ, हरिषेण, वीर, श्रीनच्छ, पथन्दि, ल्रीवर प्रथम, श्रीधर हदित्तीय, श्रीषर पृपतीय, देवसेन, अमरकोति, कतकामर, सिंह, छाखू, यश कीि, पेवचन्द्र, उपथ- पष्द्र, रइव, तारणरुतवमी आि पेतालोस अपस्रथ-करियो->ेखकोी और उनको रपंचाणोका सक्षिप्त परिचय चिप हैं | पृप्तीथ परिच्छेद ; हिन्दी तथा देशज भाषा-करवि एवं लेखक इसमें वनारसीदास, ख्यचन्द्र पाण्डय, जगजीवन, कुनरपाल, भूषरदास चानतरायथ, किशनसिह, दौलतराभ प्रथम, दीलतराम द्वितीय, टो समस्य, म।भचत्द, भहु।चन्‍्द औ।दि ५०वीस हिन्दी-कषियों और छंखकोका उनको 10/27 अद्धित है। अच्य देशज ५।५।अ म फात्पड, तमिल और 4২৩৭, সহ काव्यका रो एवं रेखकोका सी परिचय दिया गया है | चंतुथ परिच्छोद : पद्मानलियां इस परिज्छेंदमे 1 छत्त-पदचावकि, सेनण-५६। नार, (९२९५५ य८स्।९- भ५-पट्धावछि, आदि नौ पद्टावछियां सकलित है । छन पट्टावलियोमे कितना ही इतिहास भरा हुआ है, जो राष्ट्रीय, सास्क्ृतिक भर साहित्यिक दृष्टियोसे बडा भहर््वपूर्ण एव उपयोगी है । हक भरक।९ भुत महा अच्यसे जहाँ तीर्थकर वर्बसान-महंावीर और च॑ ४ এ ३ £ र । ९८111 (८ 4२4 १६ ट < 0




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