एकलव्य | Eaklavya

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
10 MB
कुल पष्ठ :
318
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)बाण दो, हे नीलकंठ ! हे किरात कामु कार्मकी |
गूज उठे व्योम, वन, आन्त, गिरि-कन्द्रा |
शब्द-वैध की अलक्ष्य लक्ष-लक्ष ध्वनि मे,नृत्य करे काव्य ओर काव्य मं वसुन्धरा ||पूर्व काल की कथा का कठिन कोदंड है,
उसमें प्रत्यंचा चे मेरे महागीत की।
मेरे प्रमु! वीर एकलव्य तीच तीर है,
जो विष्य वेधता है शक्ति ले त्र्ताल् की |हे फिरातराज । मे किरात-गीत गां जी ,
४ जटाटवी गलज्जल-प्रवाह ” के यान हों ।
८ अहउण ! “हल? जैसे डमन्निनाद-सूत्र
काव्य - पुष्य लेके मेरे एकलव्य-गान हा ॥
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