प्रकाश की बातें | Prakash Ki Baaten

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
3 MB
कुल पष्ठ :
46
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)१५पर ऐसी बात है नहीं। धरती पर हवा तो हैं ही । हवा के न
रहने पर हमारा तुम्हारा भी धरती पर रहना बिल्कूर असम्भव हो
जाता और ये खेल भी न खेले जा सकते ।तीन : : परावत्तेन और आवत्तनतुम जानते हो कि किसी वस्तु पर गिरने वाला या उसीसे
निकलने वाला प्रकाश जब उससे चलकर या टकरा कर लौट
कर हमारी आंखो तक आ जाता है तो हमे वह वस्तु दिखाई देने
लग जाती हैं। प्रकाश के टकरा कर लौटने की इस क्रिया को परावत्तंन
( [২6860007 ) कहते हे |प्रकाश का परावत्तेन बहुत जरूरी हैँ । इसके बिना प्रदीप्त
वस्तुओ के सिवा और कुछ दिखाई नही दे सकता । लेकिन अगर
प्रकाश का परावत्तेंन अचानक बन्द हो जाय तो क्या होगा ” सडक
दिखाई देनी बन्द हो जायगी। आसपास के मकान और दूकान नही
दीषेगी । सडक पर चरते आदमी भी नजरो से ओभल हौ जायगे ।
तुम आवाज तो सुन सकोगे, पर किसी को देख नही पाओगे । रात
में आकाश मे तारे तो प्रदीप्त होने के कारण दीखते रहेगे, पर चाँद
नही दीखेगा । मोटरो की जलती बत्तिया तो दीखेगी, पर मोटर
नही । यह सब कंसा लगेगा, इसकी तुम कल्पना कर सकते हो?
ओर यह् सव क्यों ? सिफं इसकिए कि प्रकृति का एक काम स्क गया
है--प्रकाश का परावरत्तंन बन्द हो गया हं । जवत्तक परावत्त॑न नही
होगा, कुछ दिखाई नही देगा । कुदरत के खेल भी कैसे विचित्र हं ।
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