सर्दी जुकाम खांसी | Sardi Jukam Khansi

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : सर्दी जुकाम खांसी  - Sardi Jukam Khansi
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about जे. के. शर्मा - J. K. Sharma

Add Infomation AboutJ. K. Sharma

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
5~ ७ -कठिन | इस पुस्तिकाकों पढ़ते चलिए, भरीरको इस वुराईसे छुटकारा दिलानेकी विधि आपको मालूम हो जायगी । मजेदार वात तो यह ই कि सदा बने रहतेवाले जुकामसे मुक्ति पानेके लिए रोगीको अपने गरीरको इतना निर्मेछ बनाना होता है कि फिर कोई भी रोग उसके पास न फठक सके । और कीटाणु ! ये बेचारे तो हर जगह रहते हूँ, पर उनसे सर्दी- जुकाम नही होता ।रोगी रहना एक वुरी आदत ह, कोड मजवृूरी नही ह ।सर्दी-जुकामसे छुटकारा पाना कितना आसान हैं ओर सो भी नई उम्रमे, यह वतानेके लिए में आपको एक युवककी कहानी सुनाता हूं। उसकी उम्म्र इककीस वर्षकी थी ओर जन्मकालसे ही उसे जुकाम चला आ रहा था। जुकाम: उसे वना ही रहता और जाड़ोंमें जोरकी सर्दी हो जाती जितना भी पसा वह खचं कर सकता था, उसने जुकामकी दवाएं खरीदने, विगेपक्ञोसे इखाज कराने तथा नाकका जापरेगन करानेमे खच करिया । जव भी उसके पास कर पैसे इकट्‌ठे हो जाते थे, नाकके डाक्टर किसी-न-किसी रोगके नामपर उसकी नाकमें आपरेशन करनेकी आवश्यकताका अनुभवकरने लगते ।हवा-पानी बदलते रहने और डाक्टरोंकों दिखानें और दवा लेते रहनेपर भी युवककी दणा विगड़ती ही गई। एक भी अचूक औषध॑का निग्ञाना उसके रोगपर न बेंठा।अंतमे यह वातत उसके अंत.करणमे स्फुरित हुई कि मनुप्य-ন্‌




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now