स्वर्ण पथ | Swarn Path

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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१२ स्वण-पथ । रूपी तूफानमे निराद होकर रोने बेठ जायें | कोई शक्ति आपकी दुदंशा नहीं कर सकती । ईश्वरके मह्दान्‌ पुत्रकी कोई उसके उच्च आशबसे कदापि नहीं हटा सकता । कोई अभद्र प्रसड़ आपके आन्‍्तरिक प्रदेशको ইতি नही कर सकता । आपको अस्तव्यस्त करनेकी शक्ति प्रतिकूलतामे नही है | आपके अंदर जो ईश्वरीय दिव्य तत्त्व निहित है; उसे प्रकट कीजिये । जो सद्भावनाएँ अंदरसे प्रकारामे अनिको छटपटा रही है उनपर कुठाराघात न करं । उन्हे बेरोक-टोक प्रकाशमे आने दे । सद्वृत्तियोंके प्रकाशित होनेपर ही आपकी महानतामे अभिवृद्धि हो सकती है। यही आपकी देदी सम्पदा है। इसके बछूपर आप कल्याणमार्गके अनुगामी हो सकते हैं । इसीसे आप विश्वविजेता बन सकते हैं । दैवीषम्पदा क्रोध, मत्सर द्वेष) स्वार्थकी कुत्सित चइत्तियोसे आपको ऊँचा उठाये रख सकती है। ईंश्वसने आपको ऐसी शक्ति दी है कि उससे दुर्विचारको सररूतासे दवाया जा सकता है | तनिक उत्त व्यक्तिको दशाको कल्पना कीजिये; जिसके सनमे यह विचार घुस गया है कि “मै दीन-हीन हूँ, कमनसौब और गुलाम हैँ |? वह स्वयं अपनी दृष्टिमे हेय है | जेसा दूसरे कह देते है; वह उसीको सत्य मानकर चलता है। संसारके स्वार्थी मनुष्य श्रान्ति और होनत्वके दीन-हीन विचार ला-छाकर उसके अन्तःकरणमे प्रविष्ट करा देते हैं और वह बेबसी दिखाकर उन्हीके अनुसार कार्य करने छगता है । दूसरेकी धारणाएँ ही उसकी स्थायी इत्ति वन जाती हँ । विचारोकी यह परवशता संसारके असंख्य व्यक्तियोको दुःखदं अवखामें गिरये हए है । बाइबिलके एक स्थलमे एक ऐसे व्यक्तिकी कहानी है; जिसने अपने पालतू कबूतरोके नीचे वाजका एक अंडा ख्गा रला था | यथासमंय कबूतरोने उसमेसे बच्चा निकाछा । वह कबूतरोके अन्य बच्चोकी तरह एथ्वीपरसे दाना चुंगने छगा; उन्हींकी तरह बंदी जीवन व्यतीत




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