मानवता के पथ पर | Manavata Ke Path Par

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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[१५४ ) एयम्‌ महायुद्धों था सूत्र पात होता है। 'मानयत्ता के पय पर' नामक इस पुरतक में मानवता - उप्लायक प्रवचनों या नियधों फा संग्रह किया गया है । प्रत्येक प्रथलन प्रभाव पूणा एव प्रयाण रत्तम्म है। प्रयचन के धारग्म में सम्पादक थी ओर मे एक टिप्पणी भी दी गई है णोप्रवनन का सार प्रस्तुत करती है । ये प्रवचन जहाँ जिस स्थान पर हुए हें, उनका भी सेत कर दिया गया है । सभी प्रवचन घठ़े विचारपूर्ण घोर पतल्याग- कारी ह । इनमे जीवन फी प्रमैक पमस्याश्रों पर सुदरता पूरक विणद विवेचन किया गया है | जैन साधु रान्‍्त वस्तुत वटे त्यागी तपस्वी होते हे । वैसी तितिक्षा श्रौर तपस्या प्रय्र क्षति -यून माप्राम पायी जाती रै 1 झतएव प्रवचनों में जो भावनाएं व्यक्त पी गयी हैं, वे प्रनुशुति पं प्र्थात्‌ प्रनुगवात्मक हूँ । इनका प्रनाव द्मा पुन्नषः फे पाटको पर प्रवद्य पड़ेगा श्रोर पडना चाहिये । হল स्वार्थान्च संसार में ऐसी माग दद्यक रचनाएं प्रवष्य हो प्रकाश-स्तम्म या फाम करेंगी। इस प्राञ्जल प्रकादान फे लिये सम्पादय एवम्‌ प्रवचन-वर्त्ता भुनिराज श्री नाभ चद्रजी मानयत की शोर से धन्यवाद के अ्रधिकारी हैं । शचूर सदन श्रागरा । - हरिशेकर হালা थावणी २०१७ वि मोट --ध्ृष्ठ ६० पर 'मैले दिल! क्षीप॑क के प्रतगत उदू' का सैर अशुद्ध ब्रिट है । पण्डित जी ने भ्पनी भुमिका में उसका शुद्ध रूप प्रस्तुत किया है, --प्रकाप्क




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