रावबहादुर | Raavbahadur
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
14 MB
कुल पष्ठ :
212
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)मोलियर का परिचय १२रह गए । सैव उसकी प्रशंसा होने लगी । यटा तक कि
उसकी सास्य-कला-निपुणता की वात राज-घराने तक
पहुँची । उसे बादशाह लुई को अपनी कला-निपुणता
दिखलाने का अवसर प्राप्त हुआ । मोलियर की नाख्य-
कला-चातुरी देखकर लुई प्रसन्न हो गया, ओर प्रसाद
स्वरूप मालियर को अपना जीवन श्रत समय तक खुख-
पूवैक विताने के लिये राजाश्रय मिल गया । राजा की कषा
हुई, तो प्रज्ञा म॑ सम्माव होना ही चाहिए । मंडली बहुत
बड़ी हो गई, ओर उसका नाम भी बदल दिया गया। इस
प्रकार मोलियर का सितारा चमक उठा । मोत्ियर को
सफलता तो हुईं, पर सफलता के साथ-साथ उसकाः
कार्य-भार बहुत बढ़ गया | अपनी नाटक-मंडली का
प्रमुख वही था। इसके अतिरिक्त मंडली का प्रधान पात्र
भी था। इन ज़िम्मेदारियों को निबाहते हुए भी उसको
नाटक लिखने का समय मिल जाता था । उसकी शक्ति ओर
कार्य-कुशलता ने यह सब भार उठा लिया । श्रगले दस
वर्षो में उसने २८ नाटक लिखे । ये नाटक एक-से-एक बढ़-
चढ़कर हैं, और इन्हीं के कारण आज़ वह संसार के सर्वोच्च
नाघ्यक्ारो मे गिना जाता दै । मोल्लियर केश्रत्यधिक परिश्रम
का फल यह हुआ कि बुद्धि ओर शरीर, दोनों ही, कार्ये-
भार से दबकर, धीरे-धीरे जवाब देने लगे । शरीर में रोग
ने धर कर लिया | एक दिन, फ़रवरी, सन् १६७३ ई० को,
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