मास्को में विदेशी जीवन | Masko Me Videshi Jivan

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
5 MB
कुल पष्ठ :
162
श्रेणी :
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के. आर. गुप्त - K. R. Gupt
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लीडिया कर्क - Lidiya Kark
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)[६ |तिर्माण किसी धनी व्यापारी ने १६१२ है० में किया था। उसका विवाह
किसी शिष्ट कुटम्ब में हुआ था। क्रान्ति के पश्चात् बाह्शविक सरकार ने
इस पर अधिकार कर लिया और इसका प्रयोग विदेशी कार्यालय के
अतिथि भवन के रूप में होने लगा । वाद्शविक विदेशी न्त्री किकरन की
भूष्यु उस कमरे में इहै थी जो मेरा शयनागार हे । (सके इस यत का
विश्वास दिलाया गया है कि उसकी रूत्यु साधारण रूप से शान्ति पूर्वक
हुई थी) ।संधुक् राज्य ने १६३३ है ० में बार्शविक सरकार को सान््यता दी। विल्ल
बुल्तिद को राजदूत नियुक्त किया गया । उसने इस भवन को राजदूतावस के
छिए फिराये पर लेने की बातचीत की | यह भवन राजदूत के रहने
के लिए था | एक शम्य भवन जिसे 'मोखवाया? कहते हैं. दफ्तर के लिए
तथा महामात्रावस और अमले के कोगों के रहने के लिए किराये पर
का । हमारी सरकार धब भी इन दोनों भवनों क्रा किराया
देती है ।स्पेसो द्वाउस धहुत ही पिशाल भवन है। पहली संजिल की छुत २८
फीट ऊँची है । दूसरी मंजिल की २० फीट । उसमें थुक बदा दालान है
ज्ञो ८२ फीट लम्बा है और दो मंभिलो जितना चा है । इसकी छुतमें एक
मदहाव फानूस लटकता है। इससे बड़ा फानूस मैंने और कहीं नहीं देखा ।
यहाँ के लोग कहते हैं कि यह मज़बूती ले लगा है और इसके गिरने की
सम्भावना नद्दीं। जनरल बेड़िल स्मिथ ने आते ही इसका निरीक्षण
कराया था | थवि इसका पुक् झटफन भी किसी आगन्तुक के सिर पर
श्रा पे तो इससे कड अन्तर्राष्ट्रीय उन्तमनें पेदा हो जायें |हमारे साथ इसी भवन में राजवूताबास के दो सचिव रहते है । दिक
दैविस जो हमारा मुख्य सिव चौर रूसी विशेषज्ञ है आगामी गर्मियों सें
जा रहा दे (यहाँ विशेषज्ञ का अभिप्राय उस व्यक्षि से है जो फिसी नियतशक्री राजनीति और उसके रीति रिवाजों श्रादि का अध्ययन कर घुका हो)
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