वेदान्त | Vedant

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Vedant  by नारायण स्वामी - Narayan Swami

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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प्रस्तावना, ধু) विद्ययत ( देशान्तर ) भी जावे | गम दखार का समःकार होकर रहे नहीं | # न ৬ ক ক ৪৮ पचकम = कमम = प ক शरीर रोग ग्रत्त হই শা किसी अङ्क मे न्यूनता ( नुकस ) हो | (७) पिछली अवल्थार्म काम ( वित्रय वृत्ति ) नितान्त नष्ट हो, अर्थात काम रहेत हो जाते | (८) दो पुन्न अवश्य होने चाहिये। (०) अस्प आयु हो, अर्थात २८ से ३५ वर्ष तक। (१० ) यदि ब्राह्मण हो तो मृत्यु जल में, ओर यदि क्षत्र हो तो मकान से गिर कर॥ ~ + ^ 9 ऊुराढी बाले ग्राम में ( जो स्वामी जी की जन्‍म भूमि है) एक प्राइमरी स्कूल बहुत दिनों से स्थापित था | तीर्थ राम जी बहुत ही छोटी अवस्था इस पाठशाला में प्रविष्ट हुए । शरीर के छोटे और पटने तथा स्मरण शक्ति में अधिक चतुर देंख कर पाटा (उम स्कूल) के बह़ें अध्यापक (मौलवी मह्मददीन जी) इन पर बड़े प्रसत्




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