आत्मदर्शन | Aatm Darshan
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
8 MB
कुल पष्ठ :
406
श्रेणी :
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लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)झात्मद्शन ११को इस ग्रंथ में विस्तार पूर्वक युक्तियों के खाथ दिखायागया है और श्रात्मा को न मानने के कारण जीवन के विषय
में देकल को जो २ कदपचायें करनी पढ़ीं उनका भी दिग्दर्शन
कराया गया दें। साध दी जगत् में भिन्न २ प्राणियों का
श्स्तित्व इंइवर की रचना का योधक ई यह भी सिद्ध किया
गया है । संक्षप से यद्द कद्दा जा सकता हे कि बिना आत्मा
श्मौर परमात्मा को स्वीकार किप कवल जड़ प्रति जीवनः
की समस्या को दल करने मै सर्वधा श्रसमर्थं हे।मानसिक विकाश की समीक्षा ।` मानसिकं विकाश की सिद्धि करनेके लिये अमी चक
उतना श्राघार मी नदीं दे जञतन। कि धारि जगत् कै विकाश
की कल्पना के क्तिष। मानसिक विकाश श्राधार रदित
कट्पना मात्रे! प्राचीन समय स्र अव तक क्रमशः शान
` का विकाश नदी इश्यादे। प्राचीन काल कतिपय बातों में
झर्वाचीन काल स बढ़ कर था इस विषय में भी इस ग्रन्थ में
बहुत कुछ लिखा गया दै । परन्तु मुख्य समस्या यद दहै कि
मजुय्यों में यदि ज्ञान का विकाश भी माना जावे सो उस
ज्ञान का स्रोत क्या हे ? मनुष्य आर पशु जगत् के बीच
ज्ञानः अथवा क्वान को धारण करने बली यक्त माषाः पक
मेदक रेखा ( [76 ग 0्णथप्ध्प्रणा ) है । मचुष्यो में
चह छान कदां चे आर्या? ` पशु अवस्था खे उसका विकाश
वैज्ञानिक रीति पर सिद्ध नहीं दो सकता । उस शान का
स्रोत 'ईइ्चरीय शान दी दो सकता दे ज्ञो कि वेदं के रुप
में दे ५ इस विषय में भी इस अ्रन्थ में बहुत मकाश डाला, गया है।
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