श्री रविशंकर शुक्ल अभिनन्दन ग्रंथ | Shree Ravi Shankar Shukla Abhinandan Granth

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Shree Ravi Shankar Shukla Abhinandan Granth by रामगोपाल महेश्वरी - Ramgopal Maheswari

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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यह क्यों ? व को भहानता दो रनों में अरगट होती हैं | कहां किसी गण विशेष को प्रतिशायता में महानता हूं तो कहीं विविध घोर श्रनेक गुणों के संलिकास की जोवन-शक्ति से सहा- नता का दर्शन होता है । झादरणोप पण्डित रविशांकरली शुक्ल का जीवन दुसरे प्रकार को महानता का उदाहरण है । उनमें प्रनेक गुणों का समृच्चण है और जोवन को शनेकविप पहलुओं से उनका जीवन विकसित हुआ हैं । सध्यप्रदेश में प्राज़ उख के सातें उसका झपना स्थान हूँ स्वास्व्य-सम्पत्ति में इस श्रवस्वा में भी उनकी अपनी विशेषता है कार्षपोकसता में तथणों को मी लड्जित करने की क्रियाशीसता है विचारों को. दुड़ता है कार्ष को लगन है बालकों के समान हंसी को पवित्रता है और कभो-कमी उनको बुढ़ता में कठोरता के दर्शन हो जाय तब भी उसके भीतर प्रेस का प्रवाह है और झहिसा का स्रोत हैं । उनका हुदय उनके शरीर के समान हो विशाल हू ओर गहन है जिस में साथियों के स्वत्प झ्पराधों को समा लेने कीं शक्ति है। किसी के कन्घे पर हाथ रखते हो था किसो के हाथ को दुडता से पकड़ लेते ही उनके प्रेम का ्लोत मानों बहू उठता है झोर एक अमोकषों निकटता का झनुनव होता है । उन्हें साहित्य में रस हे । संगोत से प्रेम हैं । इस श्वस्था में भी नवीन विचारों को ग्रहण करने की चुत्ति तचा जन-संबा और जन-कत्पाण को उत्कट झभिलावा है । उनको ज्ञानपिपासा झाज मो प्रखर हैं । राजकत्तत्रों में उनकी उच्न के कारण उनको खास विशेषता है मौर बे उनसे पिकचताते छत कामत को खेगी में सप्रणी हैं । उनके समस्त गुणों का यर्णन करना कुछ कडित है भ्रौर जितनों उतकी निकटता में मनुष्य जाता हैं उतना ही उनके विशिष्ट गुर्णों का उस पर झसर पड़ता है छाप पदतों है और बह स्देव के लिए उनका बन जाता है । भनुष्यों को जौर साथियों को निकट रखने का उनमें श्रजीव जादू है घोर इसो कारण समस्त सध्यप्रदेश में वे राज इतनें लोकप्रिय हूं और उनका जितना व्यक्तिगत परिचय है उतना शौर किसी का नहीं है ।




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