इंडियन प्रेस रीडर - तीसरी किताब भाग 2 | Indian Press Readers Book Iii Part-ii

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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या का वा 1 थपुन-समनारायण ने स्टेट ठाकर ज़मीन पर रफ्ती घार सब के अपने दिलदी दिल में सोचने छगे कि देखें स्लेट पार डे का कया तमाशा होता हैं । उस्ताद ने रामनारायण से कहा + चमड़ के कुकड़े के स्टेट पर रखवार इतनो जार से दुधाओधोउसके अंदर की दया सब निकल जाय । चमड़ा नम पार छा ना था हो, रामनासयय न सूच अच्छो तरद उसके म्लेट दघाया |६. जय. रामनातयण चमड़े का दवा चुका दो उस्ताद ने वद्धा वि. अब जरा नागा पड़ कर चमड़े के डुकेटे काउठाओं ।उननयामनागयण समकों था कि घमड़े का टुकड़ा जरा दी में उठ झावेगा 1 भर मगर जब उसने तागे दे पड वार पाया डर सा चद्द न उठा ।<८-उम्ताद से बदा--दार शोर से पेंचो । रामनारायण ने लाये देत जोर मरे सच्या सार इस तर धघमऐं वा टुबडा उप्पर उठ भाया । मगर इस के साय पसाथ स्टेट भी उठ भाई । रामनारायस तागा पद डे रहा था शर स्टेट उसमें सटदः रदी थी । ब--यए देय दर साहब दे धुत हो यंग हुए्ए टैर राम शरापण कदने टगा हि; चमड़े था टुचडा इटेट में सरेदा थ1 सरहद पका छुआ हैं ।




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