राधेश्यामकीर्तन | Radheshyamkirtan

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Radheshyamkirtan by राधेश्याम - Radheshyam

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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কর ৯ ¢ #७ मा मिका #8६ | पाठक ! ৮ € ২ , पुस्तक बनाते और पढ़ते हैं, ज्ञानके लिय । कणा भागवत कहते | अर अ्रवण करते है, परम और खुवार के लिये गायनगाते और /# सुनते हैं, सनके राकन और आनन्द के लिये। वत्तमानकाल मं-पदि आप पतक्तपात छाड़के देखे, तो पुस्तकें शायद कुछ मिलजा५, किन्तु ऊपर लिग्व जस कथयाबाचक ओर ৮ गायक इने गिने हा दिखलाह देवेंगे ॥ नहीं ता-पुस्तकों में तो/कूंठे गन्दे क्रिस्सीकी! 'गुलो वुलब নন मगडोंकी? तादाद बढरही है । ओर कथावाचरकी में “चुन्मटदार डुप्दटा डालकर हरंदार तिलक लगाकर- मज़तार हाव भाव करके पुरुषों का रिम्कानक्रा,स्त्रियों को लुभाने का,आर चुहचुदाते लतीफे सुना सुनाकर “घनोपाजन ?' करनेका चक्र चन्त रहा है| पुरुषों को उपदेश देना नहींजानते, स्त्रिपोफ्ा माता बहिन नहीं सममतते। “हम व्यासगर्द ত্বক ইত ই इस बातका विचार नहीं करते। মী ইল “রী” आलाचना स, मर कथयावाचक भाह (चः नहीं। कारण-बादल गर्भ करके ठण्डे जल बरसाता है | संग खिचकर और चाट खाकर आनंद देता है । जिनमें उपरोक्त बातें हैं। और जो हमारी कथा और व्यासगर्शा के नामका कलाकित कर रह ई। उन्हींके सुधार के लिय, उन्दीका जगाने के लिप एसा लिग्व रह हैं । नहीं तो जा सच व्यास हं, सच्चे कधावाचक हैं, सच्चे उपदेशक हैं वो मरे पूज्प मरे माननीय,मरे शिरोधायय, मरे धम्मगुरू ६ । “मुश्क खदबिबोयद न कि अत्तार गोयद” ৯৪৯৪৪৪৯৪৯৪৪ & & & & & & & & & च छः कक्षकः ১১৬৮৪১৯৯৯৯৯৯৪৬৬ প্র কু তু ডু ও সা তুর सरू रक्क्ङु জজ 9. > 3 4 28 40 > ® 92 वा ०० 92 «० & &, ¢ > 3 &॥ 8 3 & 8১ 887১8. मब रहे “गायक | सो इनमें भी “सय्पांकी सिजियां” कर. बटियां लेने न देय! | ऐसे २ गानोंका घोर प्रचार दै | इसमें गायक ^ ^ । । 11 1 1/1 (1 / / ॥ । / / 0 1 । 1 (1/0 ॥ (५५ ভা তক তক কৃত হিতে নথ কু




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