लोक - व्यवहार | Lok Vyavahar

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
श्रेणी :
Book Image : लोक - व्यवहार  - Lok Vyavahar

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about पं संतराम - Pt. Santram

Add Infomation AboutPt. Santram

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
रयाहि का सीधा मारी भर विख्यात उठ रात शोटक में पेट्रिक बीइमर ढाई लइत छोगों के सामने खड़ा था और अपनी रुफरुताओं की सुखद था सुना रद था | श्रोत्ागण बार-बार कर हँसते थे | बोछने का करने वाले बहुत थोड़े छोप भापण करने में उठकी कर सकते हे | धक्‍्दा, मौदफो मेयर, एक पके केशों वाला वृद्ध साहुकार था । यह बल का चाप था । पहली बोर नर उसने दर्ग में बोठरे पी की, यह भुँतो को मौति छुम का जुप जड़ा रह सया। उसकी बुद्धि ने काम करने दे इनकार, मर दिगा। कहानी इसे बात का स्पष्ट उदाइरण है कि नो मनुष्य मठी मेंति वो सकता है उसके हाथ में किस प्रद्धार भेसृत्व धपने आप जाता है! बह बा स्ट्रीट में काप करता है एचौस गई से मगर में रह रहा है। इर कारु में अपने बचुन्ठमान के काम में कमी यो बढ़ा माग नहीं छिया | इस किए; बढ शायद पंच सी से भी कम मनुष्यों को ज्ामत्र! है | कारनेगी मरी हो बाने के शी ही उपरान्त, दे का मिछ आागा। डसकी सम्मेतति में वि की रकम और अन्याम- चगप्त थी। इस पर नह चहुत झा | राधघारणता, वह घर पर मैंठेजैंडे कुदला रइता, अयवा अपने पड़ोसियों के पाठ जाकर दढ़बढ़ीता | परन्द इसके बबाय, अब उरने सावफा् टोपी पहनी और नगर रुमा मैं आकर शव इदयोदूगार निंकाडे | उस रोप की बात-चीत के फठ स्वरूप, के छोगों ने उसे नगर समिति में नल 1 का फई उताइ तक कभी भविनेश्न जाकर की शर की निन्दा करता रहा । छियानने मनुष्य मेम्बरी के फ्िए छड़े हुए थे। वोट गिने गधे तो गॉडपरे मेयर के नाम पर स्तें थथिक वोट निकडे | प्राय एक सत में दी, पह लपने समान के तइस मतुष्यों में घुआ बन भया | दरों पहले बह गिल दना सका या, अपने गा्ाछाएं के प्रताप से छू सप्ताह में उचने उनसे गुना सचिक मिश्र घना छिये | इसके शमिदि के सदस्य के रूप में उसे जो देतन मिला दिवना उसने रुपया छशाया था इस 1 हैं, भरापर था। पर, एक सइस प्रति लैकड़ा की साय के




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now